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14अधिकारियो पर गिरेगी सीएम योगी आदित्यनाथ की गाज ,जांच अधिकारियों की यह गलती पड़ी भारी, कार्रवाई करने के आदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई योजना में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और शिक्षण संस्थानों पर योगी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। करीब 6 लाख पात्र छात्रों को वर्ष 2024-25 में योजना का लाभ न मिलने के कारण सरकार ने 100 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इसमें 14 जिलों के समाज कल्याण अधिकारियों को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है, जबकि बरेली के बाबू प्रमोद जोशी को निलंबित कर दिया गया है।
अयोध्या, बहराइच, रायबरेली, सीतापुर, अलीगढ़, औरेया, बलिया, बरेली, बिजनौर, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, कन्नौज, प्रतापगढ़ और वाराणसी के जिला समाज कल्याण अधिकारियों को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। इनमें अलीगढ़ की संध्या रानी बघेल, औरेया की इंदिरा सिंह, अयोध्या के रणविजय सिंह, बहराइच के रमाशंकर, बलिया के तत्कालीन अधिकारी दीपक श्रीवास्तव (अब आईआरएस में चयनित), बरेली के सुधांशु शेखर, बिजनौर के जागेश्वर सिंह, गौतमबुद्धनगर के सतीश कुमार, गाजियाबाद के वेद प्रकाश मिश्रा, कन्नौज के सत्य प्रकाश सिंह, प्रतापगढ़ के नागेंद्र मौर्य, रायबरेली की सृष्टि अवस्थी, सीतापुर के हर्ष मवार और वाराणसी के गिरीश दुबे शामिल हैं।
बरेली में 40 शिक्षण संस्थानों के 1600 पात्र छात्रों को योजना का लाभ नहीं मिला, जिसके चलते वहां के बाबू प्रमोद जोशी को निलंबित किया गया। इसके अलावा बाराबंकी, हापुड़, झांसी और प्रयागराज के समाज कल्याण बाबुओं को कठोर चेतावनी जारी की गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 14 राज्य विश्वविद्यालयों, 19 निजी विश्वविद्यालयों और 66 नोडल अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आयुष विभाग के दो नोडल अधिकारियों, आयुष विश्वविद्यालय गोरखपुर, स्टेट मेडिकल फैकल्टी, अटल बिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी, राम मनोहर लोहिया संस्थान, एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी और मदन मोहन मालवीय प्राविधिक विश्वविद्यालय के नोडल अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी। गोरखपुर, आगरा, वाराणसी, अलीगढ़, लखनऊ, चित्रकूट, अयोध्या और सहारनपुर के आईटीआई के संयुक्त निदेशकों को भी जवाबदेही तय करने के आदेश दिए गए हैं।
प्रदेश सरकार ढाई लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले एससी-एसटी छात्रों और दो लाख रुपये तक की आय वाले अन्य वर्गों के छात्रों को छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई प्रदान करती है। लेकिन इस बार लापरवाह अधिकारियों, शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों की ओर से डाटा लॉक न करने और ऑनलाइन आवेदन आगे न बढ़ाने के कारण 6 लाख पात्र छात्र योजना से वंचित रह गए।
सीएम योगी ने स्पष्ट किया है कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार ने दोषी अधिकारियों और संस्थानों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का फैसला लिया है ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो। बलिया के पूर्व जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपक श्रीवास्तव के खिलाफ भी विधिक राय लेकर कार्रवाई के लिए पत्र भेजा जाएगा।


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