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वह जीव धन्य है जो भगवान की तरफ देखे - बाबा बजरंगदास - संगीतमय रामकथा का आठवां दिन

कादीपुर (सुलतानपुर) । काम क्रोध मद लोभ में फंसा जीव कभी मुक्त नहीं हो सकता।वह जीव धन्य है जो भगवान की तरफ देखे। परमात्मा अगर हारता है तो भक्त से हारता है। यह बातें बाबा बजरंगदास ने कहीं। 
वह जूनियर हाईस्कूल मैदान में चल रही संगीतमय रामकथा के आठवें दिन कथा सुना रहे थे। 
 सीता राम विवाह की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में राम और सीता को आदर्श दंपत्ति का उदाहरण समझा जाता है। राम सीता का जीवन प्रेम, आदर्श, समर्पण और मूल्यों को प्रदर्शित करता है।  
 बताया कि राजा जनक के दरबार में भगवान शिव का धनुष रखा हुआ था। एक दिन सीता ने घर की सफाई करते हुए उसे उठाकर दूसरी जगह रख दिया। उसे देख राजा जनक को आश्चर्य हुआ क्योंकि धनुष किसी से उठता नहीं था। राजा ने प्रतिज्ञा की कि जो इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा उसी से सीता का विवाह होगा। उन्होंने स्वयंवर की तिथि निर्धारित कर सभी राजा- महाराजा को विवाह के लिए निमंत्रण भेजा। वहां आए सभी लोगों ने एक-एक कर धनुष को उठाने की कोशिश की लेकिन किसी को भी इसमें सफलता नहीं मिली। गुरु की आज्ञा से राम धनुष उठा कर प्रत्यंचा चढ़ाने लगे तो वह टूट गया। इसके बाद धूमधाम से सीता व राम का विवाह हुआ। सीता ने जैसे राम को वर माला डाली वैसे ही देवतागण उन पर फूलों की वर्षा करने लगे।
 बाल व्यास सम्पूर्णानंद ने कहा कि राम विवाह का जो प्रसंग तुलसीदास ने रामचरित मानस में लिखा है उसके अनुसार भगवान राम और सीता विवाह से पहले जनकपुर के पुष्प वाटिका में मिल चुके थे। राम वशिष्ठ की आज्ञा से पूजा हेतु वाटिका में फूल लाने गये थे। सीता भी उस समय वाटिका में मौजूद थीं। जब राम और सीता ने एक दूसरे को देखा तो एक दूसरे के प्रति मोहित हो गये। सीता ने उसी क्षण राम को पति रूप में स्वीकार कर लिया। सीता इस बात से चिंतित थीं कि पिता द्वारा रखी गयी शिव धनुष भंग की शर्त को यदि किसी और ने पूरा कर दिया तो राम उन्हें पति रूप में नहीं प्राप्त होंगे। अपने मन की चिंता को दूर करने के लिए सीता अपनी अराध्य देवी पार्वती की शरण में गयीं। विशिष्ट पूजन के बाद पार्वती ने सीता को मनोकामना पूरी होने का वरदान दिया। 
 इस अवसर पर सत्यनाथ मठ के पीठाधीश्वर कपाली बाबा ने समस्त भक्तों को आशीर्वाद दिया। संचालन वरिष्ठ साहित्यकार मथुरा प्रसाद सिंह जटायु ने किया। संयोजक सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने राम दरबार चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की । इस दौरान तहसीलदार सिंह, एच एन शुक्ल, एडवोकेट विनोद श्रीवास्तव,महेंद्र सिंह समेत अनेक प्रमुख लोग उपस्थित रहे।


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