भगवान का स्मरण, चिन्तन और मनन ही सुखदायी — स्वामी रामभद्राचार्य
• विजेथुआ महोत्सव के तीसरे दिन चित्रकूट पीठाधीश्वर ने दी ज्ञानवाणी
कादीपुर (विजेथुआ) सुलतानपुर ।चित्रकूट तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी ने कहा कि भगवान का स्मरण, चिन्तन और मनन ही जीवन में वास्तविक सुख प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि भारत के पाँचों दर्शन पूर्व पक्ष हैं, जबकि वेदांत दर्शन उत्तर पक्ष है। यदि भगवान को पाना है तो वेदांत की शरण लेनी आवश्यक है, क्योंकि भगवान श्रीराम को केवल वेदांत दर्शन के माध्यम से ही जाना जा सकता है।
जगद्गुरु रविवार को विजेथुआ महोत्सव के तीसरे दिन आयोजित वाल्मीकि रामायण कथा में अपने अमृतमय वचनों से श्रोताओं को आलोकित कर रहे थे।
उन्होंने कहा, “मैं त्रिदण्डी साधु हूं। त्रिदण्डी संयासी भिक्षु होते हैं, परन्तु संसार से भिक्षा नहीं मांगते। हम तो सीतापति भगवान राम और हनुमान से ही भिक्षा मांगते हैं।”
स्वामी जी ने स्पष्ट किया कि वे चमत्कार दिखाने या भोली-भाली जनता को भ्रमित करने के लिए साधु नहीं बने, बल्कि भारतीय वैदिक संस्कृति के संरक्षण और प्रसार के लिए संन्यास को अपनाया है।
उन्होंने कहा, “जो मेरी आलोचना करते हैं, वे जान लें कि मैं किसी की निंदा नहीं करता। निंदा तब होती है जब दोष न होने पर भी दोष बताया जाए। मैं तभी बोलता हूं जब कोई सनातन परंपरा पर आघात करता है — इसलिए यह निंदा नहीं, धर्मरक्षा है।”
स्वामी जी ने कहा कि वाल्मीकि रामायण यह बताती है कि परमात्मा सभी गुणों से युक्त हैं और भगवान श्रीराम पूर्ण पुरुषोत्तम हैं।
कार्यक्रम में आयोजक विवेक तिवारी ने सपत्नीक व्यासपीठ का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील त्रिपाठी, प्रमोद मिश्र मुन्ना, डॉ. आद्या प्रसाद सिंह प्रदीप, डा. रत्नेश तिवारी, गिरिजेश तिवारी, राम विनय सिंह, ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि, सर्वेश मिश्र, अम्बरीश मिश्र, पवन कुमार सिंह, राकेश मिश्र, छोटेलाल मिश्र, सत्यम तिवारी, विजयधर मिश्र, रामू-श्यामू उपाध्याय, विजय उपाध्याय, घनश्याम चौहान, संजय तिवारी, जगदम्बा उपाध्याय सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।






















































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