आजमगढ़: 41 साल पुराने विस्फोटक मामले में अदालत का फैसला, दोषी को जेल में बिताई अवधि की सजा और 3 हजार रुपये जुर्माना
निजामाबाद/आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में न्यायालय ने करीब 41 साल पुराने विस्फोटक पदार्थक अधिनियम के मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी दिलचैन को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने दोषी को जेल में बिताई गई अवधि की सजा और 3,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। पुलिस के अनुसार, ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत गुणवत्तापूर्ण विवेचना और अभियोजन की प्रभावी पैरवी के बाद यह फैसला आया है।
1985 में दर्ज हुआ था मुकदमा
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह मामला थाना निजामाबाद में वर्ष 1985 में दर्ज किया गया था। 13 मई 1985 को उप निरीक्षक राम प्रसाद यादव ने इस संबंध में तहरीर दी थी। आरोप था कि अभियुक्त विस्फोटक पदार्थ यानी बम लेकर जा रहा था, जो रास्ते में फट गया। घटना के बाद मौके से विस्फोटक के अवशेष बरामद किए गए थे।
इस मामले में थाना निजामाबाद में मुकदमा अपराध संख्या 63/1985 के तहत विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 5 में केस दर्ज किया गया था।
विवेचना के बाद न्यायालय में दाखिल हुआ आरोपपत्र
मामले की विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पांच गवाहों का परीक्षण कराया गया। मामले की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया।
एएसजे-3 न्यायालय ने सुनाई सजा
न्यायालय में दोषी ठहराए गए दिलचैन पुत्र शकूर नट, निवासी खैरुद्दीनपुर, थाना सरायमीर, आजमगढ़ को सजा सुनाई गई। पुलिस के मुताबिक, अपर सत्र न्यायाधीश-3 (एएसजे-3), आजमगढ़ की अदालत ने दोषी को जेल में बिताई गई अवधि की सजा तथा 3,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रभावी पैरवी
पुलिस ने बताया कि ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान का उद्देश्य पुराने मामलों में प्रभावी विवेचना और अभियोजन के माध्यम से दोषसिद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में कार्रवाई करना है। इसी क्रम में 41 साल पुराने इस मामले में न्यायालय से फैसला आया।
GGS NEWS 24 | आजमगढ़ से विशेष समाचार























































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