नेपाल की भीषण फ्लैश फ्लड के बीच बाल-बाल बचा तीर्थयात्रियों का जत्था, ड्राइवर की सूझबूझ और स्थानीय लोगों की चेतावनी बनी जीवनरक्षक
•चाय के 10 मिनट ने बचा ली 28 कैलाश मानसरोवर यात्रियों की जिंदगी!
नेपाल। नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड के बीच आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक के 28 कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रियों का सकुशल घर लौटना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है। शनिवार को जब यह जत्था अपने-अपने घर पहुंचा तो परिवारों ने राहत की सांस ली। इस यात्रा में हुई महज कुछ मिनटों की देरी बाद में उनकी जिंदगी और मौत के बीच का अंतर साबित हुई।
तिरुपति की एक ट्रैवल कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर पेम्मासानी वेंकटरमना भी इस 28 सदस्यीय दल में शामिल थे। यात्रियों को नेपाल-तिब्बत सीमा के समीप स्याब्रूबेसी की ओर जाना था। इसी दौरान रास्ते में यात्रियों ने कुछ देर के लिए चाय पीने के लिए वाहन रोका। यात्रा में लगभग 10 मिनट की अतिरिक्त देरी भी हुई।
उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यही कुछ मिनट आगे चलकर उनकी जिंदगी बचाने वाले साबित होंगे।
ड्राइवर ने खतरा भांपा और तुरंत बदली दिशा
वेंकटरमना के अनुसार, रास्ते में परिस्थितियां अचानक बिगड़ने लगीं। ड्राइवर ने संभावित खतरे को भांपते हुए बिना देर किए वाहन को सुरक्षित दिशा में मोड़ दिया। इसी दौरान स्थानीय लोगों ने भी यात्रियों को आगे के रास्ते में मौजूद खतरे के बारे में चेतावनी दी।
स्थानीय लोगों की चेतावनी और ड्राइवर की तत्परता के बाद वाहन को पीछे किया गया। यात्रियों ने आगे बढ़ने के बजाय सुरक्षित स्थान की ओर लौटने का फैसला किया।
इसके कुछ ही समय बाद जिस रास्ते से यह दल गुजरने वाला था, उसी क्षेत्र में बाढ़ का पानी और मलबा पहुंच गया। यदि वाहन कुछ मिनट पहले वहां पहुंच जाता तो 28 लोगों की जिंदगी गंभीर खतरे में पड़ सकती थी।
संयोग या ऊपर वाले का संकेत?
यात्रियों के लिए रास्ते में लिया गया एक छोटा-सा चाय का ब्रेक, करीब 10 मिनट की देरी, स्थानीय लोगों की सतर्कता और ड्राइवर का सही समय पर लिया गया फैसला—इन सभी घटनाओं ने मिलकर जैसे उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी।
आपदा की भयावहता के बीच यह घटना इस बात की मिसाल भी है कि प्राकृतिक आपदा के समय स्थानीय चेतावनी, चालक की सतर्कता और समय पर निर्णय कितने महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
नेपाल में आई फ्लैश फ्लड ने कई इलाकों में सड़क, पुल और संपर्क मार्गों को प्रभावित किया है। आपदा के कारण कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं और राहत-बचाव अभियान जारी है।
घरों में लौटी खुशियां
28 तीर्थयात्रियों के सुरक्षित वापस लौटने की खबर ने उनके परिवारों को बड़ी राहत दी है। जिन परिवारों को नेपाल की आपदा के बीच अपनों की चिंता सता रही थी, उनके लिए शनिवार का दिन राहत और खुशी लेकर आया।
कभी-कभी जिंदगी बचाने वाला फैसला किसी बड़े प्रयास से नहीं, बल्कि कुछ मिनट रुक जाने से हो जाता है। इस घटना में वह चाय का छोटा-सा ब्रेक और 10 मिनट की देरी 28 यात्रियों के लिए सचमुच “जिंदगी के 10 मिनट” बन गई।

























































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