सरयू नदी का जलस्तर फिर बढ़ा, 24 घंटे में 12 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी
•बैराजों से 2.33 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद तटवर्ती इलाकों में बढ़ी चिंता, ग्रामीण घुटने भर पानी से गुजरने को मजबूर
आजमगढ़, 30 अगस्त। कई दिनों तक लगातार घटने के बाद सरयू नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। पिछले 24 घंटे में बदरहुआ नाले पर नदी के जलस्तर में 12 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जलस्तर बढ़ने से सरयू के तटवर्ती और बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार गिरिजा, शारदा और सरयू बैराजों से कुल 2,33,187 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। बैराजों से पानी छोड़े जाने के बाद आने वाले दिनों में सरयू के जलस्तर में और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
बदरहुआ में 12 सेंटीमीटर बढ़ा जलस्तर
बदरहुआ नाले पर शनिवार को सरयू नदी का जलस्तर 70.78 मीटर दर्ज किया गया था। रविवार सुबह आठ बजे तक जलस्तर बढ़कर 70.90 मीटर हो गया। इस तरह 24 घंटे में यहां 12 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई।
वहीं डिघिया में भी नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। शनिवार को यहां जलस्तर 70.04 मीटर था, जो रविवार को बढ़कर 70.22 मीटर हो गया। यहां 18 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
नावों का संचालन बंद, घुटने भर पानी से गुजर रहे ग्रामीण
जलस्तर घटने के बाद संपर्क मार्गों से पानी कम होने पर कई स्थानों पर नावों का संचालन बंद कर दिया गया है। ऐसे में ग्रामीणों को अब घुटने भर पानी से होकर पैदल आवागमन करना पड़ रहा है।
तेज बहाव और पानी के कारण कई संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त होकर गड्ढों में तब्दील हो गए हैं। इससे ग्रामीणों को आवागमन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जलभराव से बढ़ा मच्छरों का प्रकोप
बाढ़ प्रभावित तटवर्ती क्षेत्रों में जलस्तर घटने के बावजूद जगह-जगह जलभराव बना हुआ है। लंबे समय से पानी जमा रहने के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे ग्रामीणों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की चिंता सताने लगी है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से बाढ़ प्रभावित गांवों में मच्छररोधी दवा और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराने की मांग की है।
बैराजों से पानी छोड़े जाने के बाद निगाहें जलस्तर पर
सरयू नदी के जलस्तर में फिर शुरू हुई बढ़ोतरी के बीच तटवर्ती गांवों के लोग नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं। बैराजों से छोड़े गए पानी का असर अगले कुछ दिनों में नदी के जलस्तर पर पड़ने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन और ग्रामीण दोनों की निगाहें नदी के जलस्तर पर टिकी हैं।






















































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