गांव-गांव हुई ग्राम बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति और पीटीएम की बैठकें
•बाल सुरक्षा, शिक्षा और बाल श्रम रोकने को लेकर अभिभावकों को किया जागरूक।
देवरिया ।जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने बाल कल्याण एवं बच्चों की शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक अभिनव पहल की है। उन्होंने पूरे जनपद के सभी प्राथमिक विद्यालयों में एक साथ कल, बृहस्पतिवार को ग्राम बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति तथा शिक्षक-अभिभावक बैठक आयोजित कराई।
इन बैठकों में बाल कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाए जाने तथा आमजन को जागरूक करने के संबंध में उपस्थित अभिभावकों एवं समिति के सदस्यों द्वारा प्रभावी विचार-विमर्श किया गया। साथ ही बालक-बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने, बाल विवाह एवं बाल श्रम जैसी कुरीतियों की रोकथाम में सभी से सहयोग की अपेक्षा की गई।
इसी क्रम में परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता एवं बच्चों की उपस्थिति में और सुधार लाने के उद्देश्य से शिक्षक-अभिभावक बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में अभिभावकों को शिक्षा के महत्व तथा परिषदीय विद्यालयों में उपलब्ध गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के संबंध में जानकारी दी गई। साथ ही अभिभावकों को अपने बच्चों को परिषदीय विद्यालयों में नियमित रूप से भेजने के लिए जागरूक एवं प्रेरित किया गया।
बैठकों में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण एवं उनके सर्वांगीण विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। अभिभावकों एवं ग्रामीणों को बताया गया कि यदि कोई बच्चा विद्यालय नहीं जा रहा है, किसी प्रकार की परेशानी, मारपीट या दुर्व्यवहार का शिकार है, लापता है अथवा किसी अन्य प्रकार के शोषण का सामना कर रहा है तो मामले को नजरअंदाज न करें और तत्काल संबंधित विभाग अथवा प्रशासन को इसकी सूचना दें। बाल विवाह रोकने में परिवार एवं समाज की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया।
श्रम विभाग की ओर से अभिभावकों को बाल श्रम के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करते हुए कहा गया कि बच्चों का स्थान कार्यस्थल पर नहीं, बल्कि विद्यालय में है। दुकान, होटल-ढाबा, वर्कशॉप, निर्माण स्थल अथवा अन्य स्थानों पर बच्चों से श्रम कराए जाने की जानकारी मिलने पर संबंधित अधिकारियों को सूचना देने की अपील की गई। ऐसे बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कर शिक्षा से जोड़ने तथा पात्र बच्चों को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षकों एवं अभिभावकों से कहा गया कि यदि कोई बच्चा लगातार विद्यालय से अनुपस्थित रहता है अथवा उसकी शैक्षणिक प्रगति में अचानक गिरावट आती है तो उसके कारणों का पता लगाकर परिवार के साथ समन्वय से समाधान किया जाए। विद्यालय से बाहर रहने वाले, बाल श्रम में लगे अथवा किसी परेशानी से जूझ रहे बच्चे की जिम्मेदारी केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है।
आकांक्षी विकासखंडों में नियुक्त नोडल अधिकारियों ने भी अभिभावकों एवं ग्रामीणों को बच्चों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि बच्चों की बात सुनना, उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार करना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना बाल संरक्षण की पहली आवश्यकता है।
बैठकों में शिक्षा, प्रोबेशन, श्रम, आईसीडीएस, स्वास्थ्य एवं ग्राम प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित कर गांव स्तर पर बच्चों से जुड़े मामलों के प्रभावी समाधान पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि अभिभावक-शिक्षक बैठक को केवल शैक्षणिक प्रगति तक सीमित न रखते हुए बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, बाल विवाह, बाल श्रम और उनके भविष्य से जुड़े विषयों पर भी नियमित चर्चा की जाए।
बैठकों में ग्रामीणों एवं अभिभावकों से अपील की गई कि सामूहिक प्रयासों से यह सुनिश्चित किया जाए कि हर बच्चा विद्यालय में हो, सुरक्षित हो और बाल श्रम एवं बाल विवाह जैसी कुरीतियों से मुक्त रहे। इसी उद्देश्य के साथ देवरिया को बाल-अनुकूल एवं बाल श्रम मुक्त जनपद बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।


























































Leave a comment