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आजमगढ़ के इस विद्यालय की दस लोगों की नियुक्तिया निरस्त हाईकोर्ट ने डीआईओएस की आख्या से सहमति जताई, अन्य विद्यालयों की नियुक्तियों की भी जांच तेज, बड़ी कार्रवाई के संकेत

आजमगढ़। जनपद के अशासकीय सहायता प्राप्त प्राचीन धर्म संस्कृत उच्च माध्यमिक विद्यालय, प्रयागपुर भुवना बुजुर्ग में हुई 10 नियुक्तियों का मामला तूल पकड़ गया है। जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) अजय कुमार ने शुक्रवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि तत्कालीन प्रबंधक द्वारा तथ्यों को छिपाकर और कथित रूप से कूटरचित अभिलेख तैयार कर तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक की मिलीभगत से संस्कृत शिक्षा के नियमों और विनियमों के विपरीत 10 नियुक्तियां कर दी गई थीं। डीआईओएस के अनुसार यह विद्यालय इंटरमीडिएट स्तर तक अनुदानित संस्था है। नियुक्तियों के बाद इस मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका संख्या 20690/2024 (अशोक कुमार यादव बनाम अन्य) दाखिल की गई। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने 2 जनवरी 2025 को नियुक्त शिक्षकों के वेतन भुगतान के संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक से विस्तृत आख्या तलब की थी। जिला विद्यालय निरीक्षक ने न्यायालय को भेजी गई रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि वर्तमान में संबंधित उत्तर मध्यमा स्तर के विद्यालय में केवल चार सहायक अध्यापक और एक प्रधानाचार्य का ही पद स्वीकृत है। ऐसे में 10 नियुक्तियां नियमों के अनुरूप नहीं थीं। डीआईओएस ने अपनी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया कि शिक्षा निदेशक (माध्यमिक), उत्तर प्रदेश द्वारा 19 जनवरी 2011 को जारी आदेश में प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि संस्कृत विद्यालयों में चयन कराने का अधिकार जिला विद्यालय निरीक्षक को कभी प्राप्त नहीं रहा। इसके बावजूद विभागीय आदेशों की अनदेखी करते हुए कथित रूप से नियमविरुद्ध तरीके से चयन प्रक्रिया पूरी की गई। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जिला विद्यालय निरीक्षक की विस्तृत आख्या पर संतुष्ट होने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इन नियुक्तियों को नियमों के विपरीत मानते हुए निरस्त कर दिया। डीआईओएस अजय कुमार ने बताया कि वर्तमान में जनपद के सभी संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों एवं संस्कृत महाविद्यालयों में पूर्व में हुई नियुक्तियों की भी जांच कराई जा रही है। इसके लिए संबंधित संस्थाओं के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों से पत्राचार कर नियुक्तियों से जुड़े अभिलेख एवं विवरण मांगे गए हैं। हालांकि कई संस्थाओं द्वारा अब तक तथ्य छिपाए जा रहे हैं, जिसे विभाग ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि कई अन्य विद्यालयों की जांच अंतिम चरण में है। यदि जांच में नियमों के विपरीत नियुक्तियां या अन्य अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित प्रबंधकों और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में जिले के कई संस्कृत शिक्षण संस्थानों पर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिल सकती है।


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