‘कवच 4.0’ (स्वदेशी ट्रेन टक्कर बचाव प्रणाली से अधिकारियों कर्मचारियों को दिया गया प्रशिक्षण।
मऊ।वाराणसी। (इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ सिग्नल इंजीनियरिंग एंड टेलीकम्युनिकेशंस) कवच ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (एटीपी) सिस्टम के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में सक्रिय रूप से अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
इसी क्रम में (IRISET)इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ सिग्नल इंजीनियरिंग एंड टेलीकम्युनिकेशंस के तत्वधान में शुक्रवार को वाराणसी मंडल के भारतेंदु सभा कक्ष में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मंडलीय अधिकारियों एवं तकनीशियनों और लोको निरीक्षकों के लिए कवच 4.0 पर विशेष ध्यान देने के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान IRISET, Kavach को संस्करण 4.0 में अपग्रेड करने, जो बेहतर स्थान सटीकता और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के साथ सीधा इंटरफेस शामिल किया गया। आईआरआईएसईटी में उत्कृष्टता केंद्र ने क्षेत्रीय प्रशिक्षण केन्द्रों के लिए संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए हैं, जो ट्रैकसाइड और ऑनबोर्ड उपकरणों पर केंद्रित हैं। कवच 4.0 की तीव्र तैनाती के साथ, आईआरआईसेट उन उच्च-घनत्व वाले रेल मार्गों के लिए आवश्यक कुशल कार्यबल प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिनका वर्तमान में कम उपयोग हो रहा है।
वीडियो कांफ्रेंसिंग में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित एम. मुनिकुमार, ईडी/टीडी/सीओई/आरडीएसओ, सिकंदराबाद से ‘वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रशिक्षण सत्र में कवच’ प्रणाली पर ‘कवच’ (स्वदेशी ट्रेन टक्कर बचाव प्रणाली) के विभिन्न तकनीकी पहलुओं, वर्तमान कार्य प्रगति, चुनौतियों एवं उनके समाधान पर विस्तार से प्रकाश डाला । सिकंदराबाद से जुड़े अधिकारियों द्वारा परियोजना की अद्यतन स्थिति प्रस्तुत की गई तथा भविष्य की कार्ययोजना पर भी विचार-विमर्श किया गया। प्रशिक्षण सत्र के पश्चात मंडल रेल प्रबंधक आशीष जैन ने संबंधित अधिकारियों को ‘कवच’ प्रणाली से जुड़े तकनीकी कार्यों में समन्वय एवं निगरानी पर बल दिया।
उक्त ऑनलाइन प्रशिक्षण सत्र में मंडल रेल प्रबंधक आशीष जैन, अपर मंडल रेल प्रबंधक(आप) अशोक कुमार वर्मा,अपर मंडल रेल प्रबंधक(इन्फ्रा) अजय सिंह,वरिष्ठ मंडल सिगनल एवं दूरसंचार इंजीनियर रजत प्रिय सहित मंडल के वरिष्ठ अधिकारीगण एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ तकनीशियन व् पर्यवेक्षक उपस्थित थे। उक्त जानकारी अशोक कुमार,जनसंपर्क अधिकारी, वाराणसीने दी।

























































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