प्रधानाध्यापक ईंट-भट्टों पर पहुंच कर श्रमिकों को बच्चों विद्यालय भेजने को लेकर किया जागरूक
घोसी।मऊ। शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए विख्यात, गोल्ड मेडलिस्ट एवं राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित पूर्व माध्यमिक विद्यालय धरौली के प्रधानाध्यापक डॉ. रामविलास भारती ने एक बार फिर अपने सामाजिक सरोकारों का परिचय देते हुए समाज के वंचित, दबे-कुचले एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने का सराहनीय प्रयास किया। डॉ. रामविलास भारती स्वयं ईंट-भट्टों पर पहुंचकर वहां कार्यरत श्रमिकों के बच्चों से मिले, उन्हें कॉपी, किताबें एवं आवश्यक शैक्षिक सामग्री वितरित की तथा विद्यालय में नामांकन हेतु प्रेरित किया। उन्होंने अभिभावकों को आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के तहत बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा दिलाने के अधिकार के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
इस दौरान डॉ.रामविलास भारती ने स्पष्ट रूप से बताया कि बाल श्रम एक दंडनीय अपराध है और बच्चों का भविष्य केवल शिक्षा के माध्यम से ही उज्ज्वल हो सकता है। उन्होंने बच्चों और अभिभावकों को प्रेरित करते हुए कहा कि "शिक्षा ही वह सशक्त माध्यम है, जो व्यक्ति को गरीबी और अभावों से ऊपर उठाकर उसे सम्मानपूर्वक जीवन जीने का मार्ग दिखाती है।" डॉ. भारती का यह प्रयास केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाने की एक सतत पहल है। वे समय-समय पर ऐसे वर्गों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को समझते हैं और उनके उत्थान के लिए सक्रिय रूप से कार्य करते हैं। उनकी यह प्रेरणादायी पहल समाज के अन्य सक्षम एवं जागरूक नागरिकों के लिए भी एक उदाहरण है। यदि प्रत्येक जिम्मेदार व्यक्ति इसी प्रकार आगे आकर शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाए, तो निश्चित रूप से समाज और देश की वर्तमान स्थिति में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।




















































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