उमेश चौरसिया हत्याकांड में नया मोड़, भाई पर पीट-पीटकर हत्या का आरोप
अंबेडकरनगर आलापुर थाना क्षेत्र के रामनगर पुरानी बाजार में उमेश चौरसिया की मौत का मामला गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। परिजनों के अनुसार, उमेश के बड़े भाई पर उसके साथ मारपीट करने का आरोप है।मारपीट के बाद उमेश की हालत बिगड़ गई और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी और मासूम बेटे का रो-रोकर बुरा हाल है।परिजनों का आरोप है कि घटना की जानकारी मिलने के बाद मृतक की पत्नी अपने परिजनों के साथ आलापुर थाने पहुंची और पुलिस को तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराने की मांग की। परिवार का कहना है कि तहरीर देने के बावजूद कई घंटे तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया, जिससे पीड़ित पक्ष में नाराजगी बढ़ती गई।इस मामले में परिजनों ने थाने पर कथित रूप से सक्रिय बिचौलियों और दलालों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मुकदमा दर्ज न हो, इसके लिए कुछ लोग पुलिस थाने के आसपास सक्रिय रहे। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।परिजनों के मुताबिक, स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू हुई। पत्नी ने कथित तौर पर स्पष्ट कर दिया कि जब तक उसकी तहरीर पर मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता, तब तक वह शव को पोस्टमार्टम के लिए नहीं जाने देगी। इसके बाद पुलिस हरकत में आई और मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की गई। अंबेडकरनगर के आलापुर क्षेत्र में मारपीट के बाद मौत की एक घटना सामने आई है जिसमें पुलिस जांच और पोस्टमार्टम के बाद मौत की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट होने की बात सामने आई थी।
उमेश चौरसिया की मौत के मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आखिर मारपीट की वास्तविक वजह क्या थी? घटना के समय वहां कौन-कौन मौजूद था क्या मृतक को गंभीर चोटें आई थीं और यदि हां तो वे चोटें किस परिस्थिति में लगीं? इन सभी सवालों का जवाब पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मिलने की उम्मीद है।
मृतक की पत्नी और परिवार ने पुलिस से निष्पक्ष जांच, आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तथा पूरे घटनाक्रम की पारदर्शी जांच की मांग की है। परिवार का कहना है कि उन्हें किसी प्रकार का दबाव नहीं, बल्कि न्याय चाहिए।
वहीं, थाने पर कथित रूप से बिचौलियों की सक्रियता और FIR दर्ज करने में देरी के आरोप भी जांच का विषय हैं। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह पुलिस व्यवस्था और पीड़ितों की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर सकते हैं।























































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