सरयू तट पर विप्रो ने किया श्रावणी उपा कर्म
देवरिया।सावन पूर्णिमा के दिन क्षेत्र के श्रेष्ठ विद्वान ब्राह्मणों द्वारा बरहज में सरजू तट पर पहुंचकर प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी श्रावणी उपक्रम का कार्य किया गया जो प्रातः 8:00 बजे से लेकर दिन में 11:30 बजे तक चला तत्पश्चात पुनः 12:30 से अभयद राघव मंदिर आश्रम बरहज में आश्रम के पीठाधीश्वर आंजनेय दास जी महाराज द्वारा सप्तर्षियों का वैदिक मंत्रों के बीच विधिवत पूजन संपन्न कराया गया ।
पूजन के अवसर पर आश्रम के पीठाधीश्वर आंजनेय दास जी महाराज ने कहा कि श्रावणी उपाकर्म सनातन वैदिक परंपरा का एक अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक पर्व है या केवल जानू बदलने का रस में नहीं है बल्कि ज्ञान की साधना आत्म शुद्धि और वेदों के अध्ययन में पुनरारंभ का पवन संकल्प है इस मुख्य रूप से श्रावण मास की पूर्णिमा रक्षाबंधन वाले दिन मनाया जाता है। जिसमें आत्म शुद्धि, ऋषि तर्पण, और यज्ञोपवीत परिवर्तन मुख्य है
शुद्ध के लिए वर्ष भर में जाने अनजाने में हुए मन वचन और कर्म के पापों का प्रसिद्ध किया जाता है इसके लिए गाय के गोबर, दूध ,दही, भस्म ,और मिट्टी जैसी पवित्र चीजों से विधिवत स्नान किया जाता है।
ऋषि तर्पण , महान ऋषियों ने वेदों और संस्कारों का अमूल्य ज्ञान देकर मानव सभ्यता को संवारा उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए निश्चित दर्पण किया जाता है।
यज्ञोपवीत परिवर्तन किया जाता है।
इस अवसर पर आचार्य कृष्ण मुरारी त्रिपाठी पूर्व प्राचार्य संस्कृत महाविद्यालय आश्रम, बरहज वर्तमान प्राचार्य प्रणव मिश्रा,क्षितिज पांडे प्रवक्ता संस्कृत विद्यालय, शिवम पांडे, परशुराम पांडे, विशाल द्विवेदी,प्रकाश चंद्र द्विवेदी, ओमप्रकाश द्विवेदी, मुरारी मिश्र, राम ऋषि द्विवेदी ,दयाशंकर मिश्र श्रीनिवास पांडे ,सहित क्षेत्र के तमाम विद्वान गण उपस्थित रहे।























































Leave a comment