पोषण योजनाओं की सुस्त रफ्तार पर डीएम नाराज, 100 फीसदी प्रगति के निर्देश
•845 आंगनवाड़ी केंद्रों में जलापूर्ति नहीं, 252 केंद्रों में बिजली कनेक्शन का अभाव; 37 केंद्र भवन निर्माण भी अधूरे
सुल्तानपुर। जिला पोषण समिति की समीक्षा बैठक में पोषण योजनाओं की प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं मिलने पर जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह ने नाराजगी जताई। मंगलवार को कलेक्ट्रेट के नवीन सभागार में हुई बैठक में जिलाधिकारी ने आंगनवाड़ी केंद्रों की व्यवस्थाओं, पुष्टाहार वितरण, गर्भवती महिलाओं की जांच, कुपोषित बच्चों के फॉलोअप समेत विभिन्न योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को योजनाओं में शत-प्रतिशत प्रगति सुनिश्चित करने और कमियां तत्काल दूर करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी की अध्यक्षता और मुख्य विकास अधिकारी विनय कुमार सिंह की उपस्थिति में हुई बैठक में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला विकास अधिकारी, उपायुक्त श्रम रोजगार, उपायुक्त स्वत: रोजगार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला सूचना अधिकारी, सभी बाल विकास परियोजना अधिकारी और जिला समन्वयक पोषण अभियान समेत संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
पोषण ट्रैकर पर सभी बच्चों का वजन फीड कराने के निर्देश
बैठक में आंगनवाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत लाभार्थियों के वजन की पोषण ट्रैकर पर फीडिंग की स्थिति की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने सभी बाल विकास परियोजना अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक पंजीकृत लाभार्थी का वजन पोषण ट्रैकर पर शत-प्रतिशत फीड कराया जाए। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि जिले में प्रसवपूर्व महिलाओं की चौथी जांच 81.75 प्रतिशत पूरी हो चुकी है। शून्य से छह वर्ष तक के बच्चों का वजन 99.68 प्रतिशत फीड किया गया है। इनमें 1,528 बच्चे सैम और 3,487 बच्चे मैम श्रेणी में चिह्नित किए गए हैं। आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा 98.61 प्रतिशत लाभार्थियों का गृह भ्रमण भी पूरा किया जा चुका है।
पुष्टाहार वितरण में पीपी कमैचा की स्थिति सबसे खराब
बैठक में फेस कैप्चर के माध्यम से पुष्टाहार वितरण की समीक्षा में जिले की प्रगति 88.81 प्रतिशत मिली। इसमें बाल विकास परियोजना पीपी कमैचा की प्रगति महज 72.51 प्रतिशत पाई गई। इस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को चेतावनी दी और आगामी बैठक से पहले स्थिति में सुधार करने के निर्देश दिए।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की जिले में प्रगति केवल 38.82 प्रतिशत मिलने पर भी जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने अगली बैठक तक शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
बच्चों के साथ खाना खाकर जांचेंगे हॉट कुक्ड मील की गुणवत्ता
आंगनवाड़ी केंद्रों पर वितरित किए जा रहे हॉट कुक्ड मील की गुणवत्ता को लेकर भी जिलाधिकारी ने गंभीरता दिखाई। उन्होंने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को व्यापक स्तर पर निरीक्षण कराने और भोजन की गुणवत्ता की जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया कि निरीक्षण के दौरान बच्चों के साथ भोजन करें और बच्चों से भोजन की गुणवत्ता का फीडबैक लेकर रिपोर्ट तैयार करें।
48 केंद्रों पर बर्तन नहीं, कमेटी करेगी व्यवस्था
जिले के 48 आंगनवाड़ी केंद्रों पर बर्तन उपलब्ध नहीं होने का मामला सामने आया। जिलाधिकारी ने जिला पूर्ति अधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला पंचायतराज अधिकारी और जिला कार्यक्रम अधिकारी की कमेटी गठित कर आगामी बैठक से पहले सभी संबंधित केंद्रों पर बर्तनों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।
37 आंगनवाड़ी भवन अधूरे, फोटो सहित देनी होगी रिपोर्ट
समीक्षा में जिले के 37 आंगनवाड़ी केंद्र भवनों का निर्माण अधूरा पाया गया। जिलाधिकारी ने सभी खंड विकास अधिकारियों को निर्देशित किया कि आगामी बैठक से पहले निर्माण कार्य पूर्ण कराएं। साथ ही पूर्ण भवनों की फोटो सहित रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
845 केंद्रों में पानी और 252 में बिजली का इंतजार
आंगनवाड़ी केंद्रों की मूलभूत सुविधाओं की समीक्षा में भी कई कमियां सामने आईं। जल जीवन मिशन के तहत जिले के 845 आंगनवाड़ी केंद्रों पर अभी तक जलापूर्ति नहीं होने की जानकारी दी गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को इन केंद्रों पर शीघ्र पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।
इसी तरह 252 आंगनवाड़ी केंद्रों पर विद्युत कनेक्शन नहीं पाए गए। इनमें 41 केंद्रों का आगणन विद्युत विभाग द्वारा उपलब्ध कराया जा चुका है, जबकि शेष केंद्रों का आगणन तैयार नहीं हुआ है। जिलाधिकारी ने शेष केंद्रों का आगणन एक सप्ताह के भीतर पूरा कराने के निर्देश दिए।
सम्भव 6.0 में जिला 10वें स्थान पर, अधूरे लक्ष्य पूरे करने के निर्देश
जुलाई से सितंबर 2026 तक चल रहे सम्भव अभियान 6.0 की भी समीक्षा की गई। इसमें जिले की प्रदेश स्तर पर 10वीं रैंक पाई गई। समीक्षा में सैम बच्चों के फॉलोअप, गर्भवती महिलाओं की चौथी जांच, बच्चों के वजन, सैम बच्चों के ई-कवच पोर्टल पर फॉलोअप और छह आवश्यक दवाओं के वितरण में लक्ष्य पूरा नहीं होने की स्थिति सामने आई।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को अभियान के तहत सभी निर्धारित लक्ष्य समय से पूरा कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पोषण संबंधी योजनाओं का लाभ पात्र बच्चों और महिलाओं तक प्रभावी ढंग से पहुंचना चाहिए। आंगनवाड़ी केंद्रों की व्यवस्थाओं और योजनाओं की प्रगति में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


























































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