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राज्यसभा में अमित शाह का विपक्ष पर करारा तंज बोले "15-20 साल तक किसी का नंबर नहीं लगने वाला"

 

राज्यसभा में अमित शाह का विपक्ष पर तंज – 15-20 साल तक किसी का नंबर नहीं लगने वाला। राज्यसभा में मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर जमकर तंज कसा।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि – ‘…15-20 साल तक किसी का नंबर नहीं लगने वाला है। …जो कुछ करेंगे लंबे समय तक हम ही करेंगे।

…विपक्ष को लगता है कि शायद हम आएंगे तो बदलेंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं होने वाला है। इसमें बहुत देर है। आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है।’

‘आपदा का सीधा रिश्ता जलवायु परिवर्तन से…’
राज्यसभा में आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक 2024 पर चर्चा के दौरान विपक्ष पर कटाक्ष करने के क्रम में विपक्षी सांसदों के सवालों का भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तसल्लीबख्स तरीके से जवाब दिया।

अपने संबोधन के क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि – ‘…आपदा का सीधा रिश्ता जलवायु परिवर्तन से है। हम ग्लोबल वार्मिग की बात करें। हजारों साल से हम प्रकृति के संरक्षण की बात कर रहे हैं।
…आपदाओं के तरीके और स्केल बदले हैं, यही कारण है कि उनको उसी हिसाब से बदलना होगा। इसी कारण इस बिल को लेकर आए हैं। सभी लोगों से जो सुझाव मिले, उसमें 87 परसेंट सुझावों को स्वीकार कर हम ये बिल लाएं हैं।

…कोरोना 19 जैसी आपदा, बढ़ता शहरीकरण और अनियमित बारिश की आपदा व जलवायु परिवर्तन से आपदाओं का आकार बदल गया है। इससे निपटने के लिए हमें तरीके बदलने पड़ेंगे। हमें इससे निपटने की व्यवस्थाएं बदलनी होंगी।

…इसके अलावा हमें संस्थाओं का आकार बढ़ाना होगा और उनकी जवाबदेही में तय करनी होगी। हमें आपदा प्रबंधन संस्थाओं को शक्तियां भी देनी होंगी।’

‘आपदा प्रबंधन में क्रियान्वयन की जिम्मेदारी जिला की है…’
इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि – ‘…कुछ सदस्यों ने सवाल उठाया कि संशोधन की क्या जरूरत है ? मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि अगर किसी इमारत की समय रहते मरम्मत नहीं की जाती है, तो वह ढह जाती है।

…उन्हें लगता है कि शायद वो आकर इसे बदल देंगे लेकिन अगले 15-20 साल तक किसी की बारी नहीं आएगी। जो भी करना है हमें करना है।


…आपदा प्रबंधन अधिनियम पहली बार 2005 में लागू किया गया था। इसके तहत, NDMA, SDMA और DDMA का गठन हुआ। अब चिंता जताई जा रही है कि सत्ता का केंद्रीकरण हो जाएगा।

…अगर आप पूरे विधेयक को ध्यान से पढ़ेंगे तो पाएंगे कि क्रियान्वयन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जिला आपदा प्रबंधन की है, जो राज्य सरकार के अधीन है। इसलिए संघीय ढांचे को कहीं भी नुकसान पहुंचने की संभावना नहीं है।

…आपदा प्रबंधन केंद्र और राज्य सरकार दोनों का विषय है। मैं पूरे देश को ये बताना चाहता हूं कि केवल राज्य ही नहीं बल्कि सभी को जोड़ना चाहते है। यह बिल केंद्रीयकरण का नहीं है।’
 ‘हम रेडियो की जगह मोबाइल पर चेतावनी की तरफ जाना चाहते हैं…’
आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक 2024 पर चर्चा के दौरान विपक्ष की शंकाओं को दूर करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि – ‘…जो लोग बिल का विरोध कर रहे हैं, उन्हें ये समझना चाहिए कि उनकी पार्टी ने खुद सलाह दी है।

…हम रेडियो पर चेतावनी की जगह मोबाइल पर चेतावनी की तरफ जाना चाहते हैं। हम पावर बनकर उभरे हैं। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर आपदा को लेकर ज्यादा प्रयास होंगे। विधेयक में नैतिक जिम्मेदारी भी डाली गई है।

…हम सभी को यह स्वीकार करना होगा कि पिछले 10 साल में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में जो बदलाव हुए हैं, उन्होंने हमें राष्ट्रीय के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक शक्ति के रूप में उभारा है। …ये विधेयक देश की सफलता की कहानी को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए है।


…यहां कोई भी मुझे गलत न समझे। …मैं सरकार की सफलता की कहानी नहीं बल्कि देश की सफलता की कहानी की बात कर रहा हूं।’


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