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राजस्थान: निकाय चुनाव में तीसरे नंबर पर खिसकी BJP,30 शहरों में गंवाया बहुमत

राजस्थान के पंचायत चुनाव में हार के बाद कांग्रेस ने सूबे के नगर परिषद और नगरपालिका की चुनाव में जबरदस्त वापसी की है जबकि बीजेपी को तगड़ा झटका लगा है. शहरी निकायों के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस सबसे ज्यादा वार्डों में जीत दर्ज करने में सफल रही. वहीं, निर्दलीय प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे हैं जबकि बीजेपी नंबर एक से खिसककर तीसरे नंबर पर पहुंच गई है. शहरी इलाका बीजेपी का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है, इसके बाद भी पार्टी शहरी चुनाव में जीत दर्ज नहीं कर सकी है. इस तरह से बीजेपी ने अपने कब्जे वाली तीस निकायों में बहुमत गवां दिया है।

राजस्थान के 12 जिलों की 50 नगर निकाय में 43 नगर पालिका और 7 नगर परिषद के 1775 वार्डों के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं. कांग्रेस को 620 वार्डों में जीत मिली है, जबकि निर्दलीयों के खाते में 595 वार्ड आए हैं. बीजेपी को 548 वार्डों में जीत मिली हैं. इसके अलावा बसपा के 7, सीपीआई के 2, सीपीआई (एम) के 2 और आरएलपी के 1 सीट मिली है।

बता दें कि राजस्थान के 2015 के इन 50 निकाय चुनाव में में से 34 शहरों में बीजेपी अपना कब्जा जमाने में सफल रही थी, लेकिन 5 साल बाद सिर्फ चार स्थानों पर अपना पूर्ण बहुमत जुटा पाई है। दिलचस्प बात यह है कि प्रदेश के तीस ऐसे निकाय हैं, जहां निर्दलीय अहम भूमिका में हैं. कांग्रेस के पास विपक्ष में रहते हुए इन 50 में से 14 शहरी निकायों में अध्यक्ष थे. अब 16 में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला है. हालांकि, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष 40 निकायों पर अपना अध्यक्ष बनाने का दावा कर रहे हैं।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि बीजेपी का तीसरे स्थान पर सरक जाना साफ संकेत देता है कि लोगों के मन से बीजेपी दूर होती जा रही है. उन्होंने दावा किया है कि राजस्थान के 40 से अधिक स्थानों के निकाय पर कांग्रेस अपना बोर्ड बनाने में सफल रहेगी. डोटासरा ने कहा कि प्रदेश में जिन स्थानों पर निर्दलीय बहुमत की ओर अग्रसर है वे सभी भी कांग्रेस समर्थक ही है. डोटासरा ने कहा कि एक तरह से साफ है कि कांग्रेस निर्दलीयों के जरिए शहरी इलाकों में अपना कब्जा जमाने की कवायद करेगी, जिस तरह से जिला परिषद के प्रमुखों पर कब्जा जमाया है.

निकाय चुनाव में भले की कांग्रेस सबसे ज्यादा वार्डों में जीत दर्ज करने में सफल रही हो, लेकिन पार्टी के 18 विधायकों और 4 मंत्रियों के क्षेत्रों में निकाय चुनाव में कांग्रेस बहुमत से दूर रह गई है. इनके क्षेत्रों में निर्दलीयों का बोलबाला है. इन दिग्गजों के शहरी निकायों में निर्दलीयों के बिना नगरपालिका अध्यक्ष नहीं बन सकेंगे. गहलोत सरकार के चार मंत्रियों में केवल कृषि मंत्री लालचंद कटारिया के क्षेत्र जोबनेर नगरपालिका में ही कांग्रेस बहुमत के साथ बोर्ड बना है. बाकी मंत्रियों के इलाकों में कांग्रेस को नगरपालिकाओं में बहुमत नहीं मिला है.

मंत्री राजेंद्र यादव के क्षेत्र कोटपुतली नगरपालिका में निर्दलीयों का दबदबा है. मंत्री भजनलाल जाटव के विधानसभा क्षेत्र में वैर और भुसावर नगरपालिकाओं में निर्दलीयों का बोलबाला है. खनन मंत्री प्रमोद जैन भाया के क्षेत्र अंता में नगरपालिका में कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला है. यहां भी निर्दलीयों के सहयोग से ही कांग्रेस को बोर्ड बनाना पड़ेगा. उद्योग मंत्री परसादीलाल मीणा के क्षेत्र लालसोट में कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला है यहां भी निर्दलीय निर्णायक हैं।

कांग्रेस के 5 विधायकों को छोड़ किसी भी क्षेत्र में कांग्रेस अपने दम पर बोर्ड नहीं बना सकी है. कांग्रेस विधायकों में गुरमीत कुन्नर स्टार परफॉर्मर रहे हैं. कुन्रर के इलाके में 4 नगरपालिकाओं में कांग्रेस को बहुमत मिला है. रोहित बोहरा के क्षेत्र राजाखेड़ा, गिर्राज सिंह मलिंगा के क्षेत्र बाड़ी, पायलट खेमे के विधायक पीआर मीणा के क्षेत्र टोडाभीम और इंद्राज गुर्जर के क्षेत्र विराटनगर में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिला है।

कांग्रेस के 18 विधायक ऐसे हैं, जिनके इलाकों में पार्टी अपने दम पर बहुमत नहीं ला सकी है. हालांकि, भरतपुर के डीग और कुम्हेर नगरपालिकाओं में कांग्रेस ने एक भी उम्मीदवार सिंबल पर नहीं उतारा था. अब पीसीसी चीफ तर्क दे रहे हैं कि एक रणनीति के तहत ही कांग्रेस के टिकट की बजाय निर्दलीय को चुनाव लड़वाया गया।सर्वेेेश पाण्डय


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