इमली महुआ में किसानों का हल्लाबोल: जबरिया भूमि अधिग्रहण के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान तेज
आजमगढ़, 12 अगस्त 2026। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के आसपास के गांवों में प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को इमली महुआ गांव में किसान चौपाल आयोजित कर किसानों और मजदूरों ने जबरिया भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आवाज बुलंद की और हस्ताक्षर अभियान चलाया।
चौपाल में किसानों ने कहा कि उनकी जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि परिवार की आजीविका और जीवन का आधार है। किसानों ने दो टूक कहा कि किसी भी परियोजना के नाम पर उनकी जमीन जबरन नहीं ली जानी चाहिए। चौपाल के दौरान “जमीन हमारी, कानून तुम्हारा नहीं चलेगा”, “जमीन लुटेरे कॉर्पोरेट वापस जाओ”, “इंडस्ट्रियल कॉरिडोर मुर्दाबाद” और “कौन बनाता हिंदुस्तान—भारत के मजदूर किसान” जैसे नारे लगाए गए।
गाटा संख्या 269 को लेकर उठाए सवाल
किसान चौपाल को संबोधित करते हुए पूर्वांचल किसान यूनियन के महासचिव वीरेंद्र यादव ने गाटा संख्या 269 की जमीन को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2013 में उनके पिता द्वारा 16 बिस्वा जमीन में से 8 बिस्वा जमीन की रजिस्ट्री इंद्र बहादुर यादव पुत्र रामधनी यादव के नाम की गई थी और जमीन का दाखिल-खारिज भी उनके नाम दर्ज था।
वीरेंद्र यादव का आरोप है कि बाद में राजस्व कर्मियों और यूपीडा की मदद से उक्त गाटे में यूपीडा का नाम दर्ज कर दिया गया, जिसे उन्होंने गैरकानूनी बताते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में कानून का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए। किसानों को मानसिक तनाव में डालकर जमीन लेने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी और किसान अपनी जमीन किसी भी कीमत पर देने को तैयार नहीं हैं।
“बिना मुआवजे जमीन लेने का विरोध”
सामाजिक कार्यकर्ता राज शेखर ने कहा कि इमली महुआ सहित आसपास के कई गांवों में पट्टाधारी किसानों की जमीन एक्सप्रेसवे के लिए ली गई, लेकिन आरोप है कि कई किसानों को इसका मुआवजा नहीं मिला। उन्होंने कहा कि यदि दोबारा किसानों की जमीन पर कब्जे की कोशिश की गई तो इसका व्यापक विरोध होगा।
राज शेखर ने सरकार से मांग की कि किसानों की समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए और भूमि अधिग्रहण से जुड़े फैसलों पर पुनर्विचार किया जाए।
चौपाल में छोटे लाल, मयाराम, अरविंद, कमलेश, गौतम, सोनू, मेवालाल, संजय, उमाशंकर, सुनीता, विमला देवी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण और किसान मौजूद रहे।
किसानों ने हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए स्पष्ट किया कि जमीन और आजीविका से जुड़े इस मुद्दे पर उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
आयोजक—वीरेंद्र यादव


























































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