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मनमानी फीस पर लगेगी लगाम, निजी स्कूलों के लिए सख्त निर्देश जारी

आजमगढ़ ।जिले में निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूली पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार के निर्देश पर जिला विद्यालय निरीक्षक मनोज कुमार ने सभी स्ववित्तपोषित (निजी) स्कूलों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
यह आदेश उत्तर प्रदेश शुल्क विनियमन अधिनियम 2018 व उसके 2020 संशोधन के तहत लागू किया गया है। इसके दायरे में बेसिक, माध्यमिक, CBSE तथा ICSE बोर्ड से संबद्ध सभी मान्यता प्राप्त विद्यालय शामिल हैं।
जारी आदेश के अनुसार अब सभी स्कूलों को नए शैक्षणिक सत्र में प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से 60 दिन पहले अपनी फीस का पूरा विवरण विद्यालय की वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा। साथ ही फीस मासिक, तिमाही या छमाही आधार पर ही ली जाएगी, केवल वार्षिक शुल्क लेने की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है।
निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी स्थिति में सत्र के बीच फीस में वृद्धि नहीं की जा सकेगी। प्रत्येक शुल्क के बदले अभिभावकों को रसीद देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा स्कूल छात्रों या अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताबें, यूनिफॉर्म या जूते खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे।
यूनिफॉर्म बदलने को लेकर भी सख्ती बरती गई है। अब कोई भी विद्यालय 5 वर्ष से पहले यूनिफॉर्म में बदलाव नहीं कर सकेगा। यदि बदलाव आवश्यक हो, तो इसके लिए समिति से पूर्व अनुमति लेनी होगी।
फीस वृद्धि की प्रक्रिया भी तय
यदि कोई विद्यालय शुल्क बढ़ाना चाहता है, तो उसे कम से कम तीन माह पूर्व जिला शुल्क नियामक समिति के समक्ष प्रस्ताव प्रस्तुत करना होगा और बढ़ोतरी के औचित्य को स्पष्ट करना होगा।
उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई
नियमों का उल्लंघन करने पर पहली बार में विद्यालय को अतिरिक्त वसूली गई फीस लौटानी होगी तथा 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। दूसरी बार उल्लंघन की स्थिति में भी फीस वापसी के साथ 1 लाख रुपये तक का दंड निर्धारित किया गया है।
प्रशासन का कहना है कि इन सख्त प्रावधानों से अभिभावकों को राहत मिलेगी और निजी स्कूलों की मनमानी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा।


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