नगर प्रचारिणी देवरिया में कवि गोष्ठी का हुआ आयोजन
देवरिया।नागरी प्रचारिणी सभा, देवरिया द्वारा आयोजित द्वितीय रविवारीय कवि गोष्ठी में उपस्थित कवियों ने विविध भाव, रस, छन्द से अलंकृत रचनाओं को प्रस्तुत कर अपना परचम लहराया और श्रोताओं को आह्लादित किया।
माहिर विचित्र द्वारा सरस्वती वंदना -नमन है मां शारदे हाथ वीणा है सुशोभित के बाद रंजीता श्रीवास्तव ने मन की वीणा से झंकृत ध्वनि मंगलम सवागतम स्वागतम, स्वागत गीत सुनाया। आगे क्षमा श्रीवास्तव ने सलवटें पड़ी है चेहरे पर जो मेरे, उसे मेरे दिल की उदासी न समझो गीत से गोष्ठी को नयी दिशा दिया। उसके बाद रानी दुर्गावती ने अपनी कविता जब उसने मुझसे ऐसा बोला सुनाकर एक मां की बेबसी को प्रस्तुत कर सबको करुणार्द्र कर दिया। फिर छेदी प्रसाद गुप्त विवश ने केहु के बाति में आवल गुनाह हो जाला, खैरियत दिल के बतावल गुनाह हो जाला गीत सुनाकर तालियां बटोरी। अंजलि अरोड़ा खुशबू ने मोहब्बत पर गुमा होगा, न सोचा था कभी मैने वो मेरा आसमा होगा गजल के माध्यम से प्रेम की उदात्तता को उकेरने की कोशिश की। रामेश्वर तिवारी राजन ने चंचल चित्त वियोगी वह राग ऐसा गा रहा है, उर में वेदना छुपाये अश्क उठाने जा रहा है कविता प्रस्तुत कर गोष्ठी को ऊंचाई दी। डॉ शकुंतला दीक्षित ने हिमगिरि से जन्म लिया मैने, तुम तक पहुंचने की चाह रही दार्शनिक कविता सुनायी। बिहार के गोपालगंज से आये सुबास पाण्डेय संगीत ने भोजपुरी गीत सुबह से शामे के सुधिया फटक के सुनायी। बिहार से ही आये उमेश चौबे अश्क ने जेठ महीने के प्रचंड गर्मी का वर्णन गुम सुम भइल जेठ दुपहरी सुनायी।
गोष्ठी में लालता प्रसाद चौधरी, पार्वती देवी गौरा, कीर्ति त्रिपाठी, ओमप्रकाश द्विवेदी, रविनंदन सैनी, डॉ एस एन मणि, श्वेता राय, ताज मोहम्मद, महेश सिंह दीपक, रन्धा देवी, गोपाल जी त्रिपाठी, चन्दन सोनी, प्रार्थना राय, आशुतोष त्रिपाठी आदि ने भी कविता पाठ किया। इसके पूर्व सभा के मंत्री डॉ अनिल कुमार, अध्यक्षता कर रहे इन्द्र कुमार दीक्षित ने धूप जलाकर मां सरस्वती की अर्चना की तथा सुबास पाण्डेय संगीत जी और अश्क जी को उत्तरीय भेंट कर सम्मानित किया। संचालन गीतकार सरोज कुमार पाण्डेय ने किया। गोष्ठी में पद् भूषण से सम्मानित पं हरीश तिवारी जी की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
इस अवसर पर रजनीश मोहन गोरे, सुबास श्रीवास्तव पूर्व सभासद, विनोद कुमार अग्रवाल, रामनिवास पाण्डेय, राधा देवी, रवीन्द्र नाथ तिवारी, श्वेतांक मणि त्रिपाठी, ब्रजेश पाण्डेय प्रबन्धक, दिवाकर प्रसाद तिवारी, जगदीश उपाध्याय, पुण्यदेव मणि, पवन प्रज्ञान, नित्यानन्द आनन्द, प्रार्थना राय आदि गणमान्य उपस्थित रहे। अंत में राष्ट्र गान के साथ गोष्ठी का समापन हुआ।
























































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