जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे परासिया देवार के लोग
देवरिया।बरहज: जनपद के दक्षिणांचल में बसे हुए पर
सिया देवार, विशुनपुर देवार और मधुबन-मऊ को जोड़ने वाला सरयू नदी का पीपा पुल हटाए जाने के बाद अब क्षेत्र के सैकड़ो लोग जान जोखिम में डालकर नाव से नदी पार करने को मजबूर हैं। नावों में न तो सुरक्षा के इंतजाम हैं और न ही स्टीमर की व्यवस्था। परसिया देवार के ग्राम प्रधान रमाशंकर प्रसाद ने बताया कि साल में चार महीने लोगों को अपनी जान हथेली पर रखकर यात्रा करनी पड़ती है। गांव का मुख्य व्यवसाय दूध बेचना और पशुओं के लिए चारा लाना है, जिसके लिए बरहज आने जाने के लिए मजबूर है। उन्होंने कहा कि शासन ने नाव चलाने का निर्देश तो दिया, लेकिन उसमें सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए। विशुनपुर देवार के ग्राम प्रधान ओमप्रकाश यादव ने चिंता जताते हुए कहा कि सुरक्षा व्यवस्था न होने से कभी भी बड़ी घटना हो सकती है। नाव चालक क्षमता से सवारी बैठाकर लोगों को पार करा रहे हैं। नदी पार करने की लोगों में जल्दी बाजी रहती है लोग क्षमता से अधिक संख्या में एक नाव पर चढ़ने को तैयार हो जाते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद कुशवाहा, विजय जायसवाल और राकेश ने बताया कि यहां सारे मानकों को ताक पर रखकर लोग नाव से नदी पार कर रहे हैं। इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के अवर अभियंता अखिलेश राम ने बताया कि शासन की ओर से दो नाव संचालित की जा रही हैं। प्रत्येक नाव में 20 लोगों के बैठने की व्यवस्था है और दोनों नावों पर 20-20 लाइफ जैकेट दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि फिर भी यदि लापरवाही पाई जाती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।






















































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