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भारत की डेटा अर्थव्यवस्था राष्ट्रीय अवसर: डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि भारत अब डेटा अर्थव्यवस्था को केवल तकनीकी बदलाव के रूप में नहीं, बल्कि एक रणनीतिक राष्ट्रीय अवसर के रूप में देख रहा है, जो आने वाले दशकों में निवेश, रोजगार, ऊर्जा प्रणालियों और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करेगा।

उन्होंने यह बात एएमसीएचएएम इंडिया द्वारा आयोजित वार्षिक नेतृत्व शिखर सम्मेलन में “भारत के डेटा केंद्रों को भविष्य के लिए तैयार करना: सशक्‍त आपूर्ति श्रृंखलाएं और अवसर” विषय पर आयोजित विशेष सत्र को संबोधित करते हुए कही।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की डेटा सेंटर क्षमता वर्ष 2030 तक मौजूदा 1.5 गीगावॉट से बढ़कर लगभग 6.5 गीगावॉट तक पहुंचने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि इस तेज विस्तार से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) प्रणालियों, कूलिंग टेक्नोलॉजी, स्मार्ट ग्रिड, नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण और उन्नत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

डॉ. सिंह के अनुसार, डेटा सेंटर उद्योग के विस्तार से देश में लगभग एक लाख इंजीनियरिंग रोजगार सृजित होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और इसके लिए मजबूत डेटा अवसंरचना बेहद आवश्यक है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अनुसार, सरकार डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, हरित ऊर्जा और आधुनिक तकनीकों के समन्वय के जरिए भारत को डेटा और नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में काम कर रही है।


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