श्री सीताराम विवाह की कथा सुन झूम उठे श्रद्धालु
देवरिया।स्थानीय बरहज में श्री कृष्णा इंटर कॉलेज के प्रांगण मैं चल रहे श्री राम कथा के सातवें दिन अवध धाम से पधारे हुए आचार्य धीरज कृष्ण शास्त्र
कथा के दौरान श्रोताओं को श्री सीताराम विवाह की कथा का रसपान कराते हुए कहां कि विश्वामित्र की यज्ञ के रक्षा के बाद महाराज विदेह का एक निमंत्रण पत्र महाराज विश्वामित्र को प्राप्त हुआ और महाराज विश्वामित्र ने राम लक्ष्मण से कहा कि राम हमारे साथ धनुष यज्ञ देखने मिथिला चलना है मिथिला की यात्रा शुरू हुई यात्रा के दौरान आगे गौतम ऋषि का आश्रम मिला जिसे देखकर प्रभु श्री राम को बड़ा आश्चर्य हुआ उन्होंने विश्वामित्र जी से पूछा गुरुदेव यह कैसा आश्रम है जहां पशु पक्षी जीव जंतु कुछ भी नहीं दिखाई दे रहे हैं विश्वामित्र ने बताया कि यह गौतम ऋषि का आश्रम है जहां गौतम ऋषि ने अहिल्या को श्राप दे दिया था गोस्वामी जी लिखते हैं कि उसे आश्रम में श्रापित अहिल्या शीला बन गई थी फिर
पूछा प्रभु शीला एक देखी। कहहि ही कथा मुनी हृदय विसेषी ।।
भगवान प्रभु श्री राम से गुरु विश्वामित्र ने कहा कि राम अहिल्या का उद्धार करो गुरुदेव के कहने पर भगवान श्री राम ने अपने दाहिने चरण के अंगूठे से अहिल्या को स्पर्श किया पहले पुनः नारी के रूप में परिवर्तित होकर हाथ जोड़कर भगवान की विनती करने लगी।
परसद पद पावन शोक न सावन प्रगट भाई तप पुंज सही।
देखत रघुनायक जन सुखदायक सम्मुख ही कर जोर कहीं। प्रभु श्री राम ने अहिल्या का उद्धार करके आगे बढ़े और गंगा के तट पर पहुंचकर उन्होंने गंगा स्नान किया और बहुत कुछ संत महात्मा ऋषियों को दान किया अब प्रभु गुरुदेव के साथ मिथिला पहुंचे सर्वप्रथम महाराज विदेश गुरु विश्वामित्र से अपने पूरे समाज के साथ मिलने गए राम लक्ष्मण को देखकर महाराज जनक बोले। मूरत मधुर मनोहर देखी।
भयहूं विदेह विदेह विसेषी
कहहू नाथ सुंदर दोऊ बालक।
नृप कुल तिलक की मुनि कुल पालक।।
विश्वामित्र जी ने कहा महाराज यह चक्रवर्ती महाराज दशरथ के पुत्र राम और लक्ष्मण है इन्होंने मेरे यज्ञ की रक्षा की है और तमाम असुरों का संघार किया है। राम लक्ष्मण को देखने की लालसा पूरे विदेह नगर के नर नारियों में थी इसलिए गुरुदेव विश्वामित्र से आज्ञा लेकर पूरी मिथिला नगरी को राम लक्ष्मण ने घूम कर सभी को दर्शन दिया मिथिला वासीयो ने कहा कि अगर राम जी का विवाह सीता से हो जाए तो बड़ा सुंदर होगा और अंत में धनुष यज्ञ के माध्यम से प्रभु श्री राम ने धनुष भंग कर दिया और जानकी जी से मंगल विवाह संपन्न हुआ। कथा के दौरानआजनेय दास जी महाराज, प्यारे मोहन सोनी, डॉक्टर वेद प्रकाश सिंह , मुरली मनोहर उपाध्याय ,शेषनाथ रावत ,अनमोल मिश्रा, अभय पांडे ,आंचल पाठक, श्याम जी मिश्रा, केदरबारी, रामनिवास उपाध्याय ,उमा मद्धेशिया, जनार्दन बरनवाल, प्रदीप मद्धेशिया, जयप्रकाश शास्त्री नागेंद्र मिश्रा सुभाष यादव, ओमप्रकाश दुबे ,दिनेश मणि त्रिपाठी ,हरेंद्र तिवारी, राधेश्याम तिवारी, गिरजा सोनी, माया सोनी, शशि कला शर्मा, हेमलता शर्मा ,आकांक्षा मिश्रा, अमृता मिश्रा, रेखा मिश्रा, पदमा दीक्षित, पूजा द्विवेदी, पूनम पांडे, पुष्पा पांडे, रीता यादव, वंदना यादव ,मनोरमा तिवारी, कुमकुम तिवारी सहित सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु जन उपस्थित रहे।



























































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