विश्वशांति हेतु उपयोगी है वाद प्रतिवाद और संवाद की भारतीय प्रणाली - ब्रजेश कुमार मिश्र
- लोक सरोकार समिति ने आयोजित की प्रोफेसर प्रताप सिंह स्मृति व्याख्यानमाला
सुलतानपुर। भारतीय ज्ञान परम्परा में आडम्बर और अंधविश्वास की कोई जगह नहीं है। भारतीय ऋषियों ने पूरी दुनिया को वाद प्रतिवाद और संवाद की प्रणाली दी । यह प्रणाली आज विश्व शांति के लिए उपयोगी है। हमारे देश पर लगातार विदेशियों का आक्रमण होता रहा जिस कारण यहां की ज्ञान परम्परा को क्षति पहुंची।
यह बातें पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय के प्राचार्य आईपीएस ब्रजेश कुमार मिश्र ने कहीं। वह लोक सरोकार समिति द्वारा प्रोफेसर प्रताप सिंह स्मृति व्याख्यानमाला के चतुर्थ अवसर पर नारायणपुर में आयोजित प्राचीन भारतीय ज्ञान परम्परा में विज्ञान पर्यावरण और गणित का विकास विषयक संगोष्ठी को बतौर मुख्य वक्ता सम्बोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि भारतीय चिकित्सक सुश्रुत को फादर ऑफ सर्जरी कहा जाता है। प्राचीन भारतीय ग्रंथ बताते हैं कि मानवीय, पशु और वनस्पति चिकित्सा में हम शीर्ष पर थे ।खगोल शास्त्र को लेकर जो बातें आधुनिक वैज्ञानिकों ने कहीं उसे हजार वर्ष पूर्व आर्यभट्ट ने बताया था ।नागार्जुन ने अपने ग्रंथ रस रत्नाकर में ऐसी बातें लिखी हैं जिसे आज के रसायन शास्त्री बता रहे हैं।प्राचीन भारत में तपोवन महावन और श्री वन के रूप में पर्यावरण संरक्षण की व्यवस्था बनाई गई थी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार कमल नयन पाण्डेय,संचालन समिति के सचिव डॉ धर्मपाल सिंह व आभार ज्ञापन सह सचिव प्रोफेसर इन्द्रमणि कुमार ने किया। उपाध्यक्ष प्रोफेसर निशा सिंह ने स्वागत करते हुए समिति के कार्यों का परिचय दिया।
इस अवसर पर डॉ दुर्गा दत्त पाण्डेय, प्रोफेसर रामजी तिवारी, प्रोफेसर राधेश्याम सिंह, प्रोफेसर विनोद सिंह,केएनआई प्राचार्य डॉ शक्ति सिंह,संत तुलसीदास पीजी कालेज के प्राचार्य प्रोफेसर राम नयन सिंह, प्रोफेसर जयेश नाथ मिश्र,डॉ आर.पी.सिंह, डॉ डी एस मिश्र, डॉ वी पी सिंह, शेषमणि मिश्र , उत्कर्ष सिंह व ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि समेत अनेक प्रमुख लोग उपस्थित रहे।






















































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