फूलपुर तहसील पर किसान संगठनों का प्रदर्शन, यूजीसी रेगुलेशन लागू करने की मांग तेज
फूलपुर (आजमगढ़), 20 फरवरी 2026।
यूजीसी इक्विटी नियमावली लागू करने की मांग को लेकर आजमगढ़ में आंदोलन तेज हो गया है। पूर्वांचल किसान यूनियन और सोशलिस्ट किसान सभा के बैनर तले कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को फूलपुर तहसील मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन उप जिलाधिकारी फूलपुर को सौंपा गया।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने “यूजीसी रेगुलेशन लागू करो”, “भेदभाव पर वार होगा—यूजीसी हथियार होगा”, “है हक हमारा यूजीसी—लड़कर लेंगे यूजीसी”, “न्यायपालिका में प्रतिनिधित्व की गारंटी करो”, “रोहित वैमूला अमर रहें”, “पायल तड़वी अमर रहें” जैसे नारे लगाए और सभा आयोजित की।
किसान संगठनों के नेताओं ने बताया कि मेंहनगर और निजामाबाद के बाद अब फूलपुर तहसील पर ज्ञापन दिया गया है। उन्होंने कहा कि जिले की सभी तहसीलों और ब्लॉक मुख्यालयों पर इसी तरह ज्ञापन अभियान चलाया जाएगा। साथ ही यूजीसी के मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाने के लिए गांव और कस्बों में “यूजीसी चौपाल” भी लगाई जाएगी।
वक्ताओं ने कहा कि रोहित वैमूला और पायल तड़वी की माताओं के संघर्ष के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी को गाइडलाइन बनाने का निर्देश दिया था। यूजीसी ने उत्पीड़न की घटनाओं को देखते हुए नियमावली तैयार की, लेकिन जाति विशेष के विरोध के बाद उस पर स्टे लग गया, जो न्यायसंगत नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे विश्वविद्यालय छात्रों तथा विधानसभा पर प्रदर्शन करने वाले संगठनों के साथ उत्पीड़न हुआ, जिससे यह संकेत मिलता है कि सरकार वंचित वर्गों को उनका अधिकार नहीं देना चाहती। दिल्ली की घटनाओं का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यूजीसी समर्थकों के साथ कथित अराजकता और महिला आंदोलनकारियों पर अभद्र टिप्पणियां भेदभाव की मानसिकता को दर्शाती हैं।
सभा में वक्ताओं ने दावा किया कि यूजीसी के आंकड़ों के अनुसार 2019 से 2024 के बीच विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाति आधारित भेदभाव की शिकायतों में 118 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ऐसे में यूजीसी इक्विटी नियमावली को तत्काल लागू किया जाना चाहिए, ताकि शिक्षण संस्थानों को भेदभाव और उत्पीड़न से मुक्त बनाया जा सके।
सामाजिक न्याय के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि ठोस नीतियों के लिए जाति जनगणना आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि जारी जनगणना फॉर्म में जाति का कॉलम जोड़ा जाए और जाति जनगणना सुनिश्चित की जाए।
न्यायपालिका पर टिप्पणी करते हुए वक्ताओं ने कहा कि संविधान पीठों में सामाजिक विविधता और प्रतिनिधित्व का अभाव लोकतंत्र की आत्मा को कमजोर करता है। उन्होंने संविधान पीठों में एससी, एसटी और ओबीसी के अनिवार्य प्रतिनिधित्व तथा न्यायपालिका में इनके प्रतिनिधित्व की गारंटी की मांग की।
सभा को पूर्वांचल किसान यूनियन के महासचिव वीरेंद्र यादव, सोशलिस्ट किसान सभा के महासचिव राजीव यादव, डॉ. राजेंद्र यादव और मुलायम यादव ने संबोधित किया।
प्रदर्शन में अधिवक्ता विनोद यादव, अवधेश यादव, साहब दीन, हीरालाल यादव, नंदलाल यादव समेत कई लोग मौजूद रहे।






















































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