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इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त रुख: “वाहवाही के लिए नहीं लगा सकती पुलिस गैंगस्टर एक्ट”

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के दुरुपयोग पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि पुलिस अपनी “पीठ थपथपाने” या महिमामंडन के लिए किसी भी नागरिक पर गैंगस्टर एक्ट नहीं लगा सकती। अदालत ने कहा कि गैंगस्टर एक्ट कोई सामान्य आपराधिक धाराओं की “अपग्रेडेड कॉपी” नहीं है, जिसे हर मामले में मनमाने ढंग से लागू कर दिया जाए।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि गैंगस्टर एक्ट एक विशेष कानून है, जिसका उपयोग केवल उन्हीं मामलों में किया जाना चाहिए जहां संगठित अपराध या गिरोहबंदी के ठोस और प्रमाणिक साक्ष्य मौजूद हों। बिना पर्याप्त आधार के इस कठोर कानून का प्रयोग नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा।
अदालत ने यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी भी आरोपी पर गंभीर धाराएं सिर्फ आंकड़े बढ़ाने या प्रशंसा पाने के लिए लगा दी जाएं। गैंगस्टर एक्ट लगाने से पहले पुलिस को यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित व्यक्ति वास्तव में गिरोह का सक्रिय सदस्य है और उसके खिलाफ ठोस साक्ष्य उपलब्ध हैं।
हाईकोर्ट की इस टिप्पणी को कानून के दुरुपयोग पर एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कानून का उद्देश्य न्याय सुनिश्चित करना है, न कि किसी एजेंसी की उपलब्धियों का प्रचार करना।
मामले में आगे की सुनवाई नियत तिथि पर होगी।


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