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अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन

सुल्तानपुर।स्मृति शेष हाजी अब्दुल रशीद एडो  पूर्व बार एसोसिएशन अध्यक्ष की यादगार हुआ कवि सम्मेलन व मुशायरा ।
मुख्य आयोजक पूर्व बार एसोसिएशन अध्यक्ष दयाराम पाण्डेय के द्वारा  16 मार्च दिन शनिवार को तहसील कादीपुर में एक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया और कवियों का संयोजन हास्य व्यंग कवि इन्दु सुल्तानपुरी ने किया।
 कवि सम्मेलन की शुरुआत रायबरेली से पधारी शायरा संदल अफ़रोज़ अमेठी की वाणी वंदना से हुई ।
बनारस से पधारे हास्य कवि दिनेश सिंह गुक्कज जी ने कहा कि - पत्नी ने पूछा कि ए विश्वास घात क्या होता है मैंने कहा कि जो मेरे साथ तेरे बाप ने किया है बस ऐसा ही होता है।
संडीला हरदोई की धरती से आयीं कवियत्री प्रियंका द्विवेदी ने पढ़ा कि -
कोई सपना सलोना नहीं चाहते। भाव कोई संजोना नहीं चाहते। 
शायर हामिद कमर फरीदी जलालपुर ने फ़रमाया कि - इश्क लेता रहा सिसकियां रात भर।
तारे गिनती रहीं उंगलियां रात भर।
हास्य के चर्चित हस्ताक्षर निर्झर प्रतापगढ़ी ने कुछ यों कहकर हंसाया कि -
आवा चुनाव फिर से नेता आइ गए हैं।
बरसाती मेघा की तरह उताराइ गये हैं।
आजमगढ़ की धरती के गीत ग़ज़ल मुक्तक के सशक्त यशस्वी हस्ताक्षर भालचंद्र त्रिपाठी जी ने यह पढ़ कर सबका मन मोह लिया कि -
हर किसी को भरम है यही ,
हम ही हैं सब संभाले हुए हैं।
ओज के ख्यातिलब्ध रचना कार हरि बहादुर हर्ष ए पंक्ति कि -
घर घर से अफजल निकलेंगें तो हम क्या चुप धारेंगें।
हम राणा के वंशज हैं हम घर में घुसकर मारेंगें। खूब तालियां बटोरीं।
सुल्तानपुर से आये कवि पुष्कर सुल्तानपुरी की इन पंक्तियों को काफी सराहा गया कि -
सुना था गमों में ख़ुशी भी छिपी है।
मैं रोया बहुत मुस्कराने की खातिर।
अभिमन्यु शुक्ल तरंग ओज के कवि ने जनमानस को सोचने पर बाध्य कर दिया कि -
जहां अनादर वयोबृद्ध का विवस बुढ़ापा हो जाता।
वहां विनाश सुनिश्चित समझो वो घर पनप नहीं पाता।
कवि संयोजक और हास्य व्यंग्य कवि इन्दु सुल्तानपुरी ने यह कहकर सबका मन मोह लिया कि -
जो बाहर ही बाहर संवरता बहुत है।
हरी देश की खेती चरता बहुत है।
चोरी के संग सीना जोरी भी करता,
कलम बोल दे तो अखरता बहुत है।।
आशु कवि मथुरा सिंह जटायु  ने अपने अध्यक्षीय काव्य पाठ से उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया।
कपाली  बाबा जी ने साहित्य और साहित्यकार के धर्म और उनकी शक्ति का शानदार निरूपण करते हुए सभी कवियों का उत्साह वर्धन और आशीर्वाद दिया।
अंत में मुख्य संयोजक दयाराम पाण्डेय ने सबके प्रति अपना आभार वय्क्त् किया ।


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