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शिव पार्वती विवाह की कथा सुन सुन झूम उठे श्रद्धालु।

देवरिया।बरहज नगर पालिका क्षेत्र के अंतर्गत पचौहा वार्ड में स्थित
 संकट मोचन हनुमान मंदिर पर चल रहे श्री राम कथा के दूसरे दिन कथावाचक विशंभर जी महाराज द्वारा भगवान शिव और मां पार्वती के विवाह की चर्चा करते हुए कहा कि पार्वती पूर्व जन्म में सती के रूप में थे और भगवान भोलेनाथ के साथ अगस्तऋषि के आश्रम पर प्रभु श्री राम की कथा सुनने गई थी भगवान शिव ने प्रभु की कथा श्रद्धा और विश्वास के साथ सुना वही सती ने कथा श्रवण नहीं की। भागवत कथा सुनकर शिव और पार्वती लौट रहे थे मार्ग में प्रभु श्री राम लीला कर रहे थे भगवान शिव ने प्रभु के लीला का दर्शन किया और प्रणाम किया जिसे देखकर सती के मन में संदेह हो गया सती ने कहा प्रभु इन राजकुमारों को देखकर आप प्रणाम कर रहे हैं आप तो स्वयं देवों के देव महादेव है जिस पर भगवान शिव ने कहा की यही मेरे प्रभु है लाख समझाने पर भी सती को बात समझ में नहीं आई और सती परीक्षा लेने चली भगवान शिव ने उसे समय भी समझाया की परीक्षा बड़ी सावधानी से लेना सती ने सीता का भेष धारण किया 
प्रभु श्री राम ने प्रणाम किया सती समझ गई भगवान ने पहचान लिया आगे चलकर भगवान शिव के समक्ष पहुंची और भगवान शिव से भी परीक्षा की बात छुपा कर रखें लेकिन भगवान शिव सब जान गए और उन्होंने संकल्प लिया। 
शिव संकल्प की मन  माही।
यही तन सती भेंट अब नाहीं।।
सती ने भगवान शिव से बार-बार पूछा प्रभु आपने कौन सा संकल्प लिया लेकिन भगवान शिव ने कुछ नहीं बताया सती दक्ष के यज्ञ में अपनी जीवन लीला समाप्त की।
सती ने मरते समय भगवान से वर मांग लिया। 
सती मरन सन हरि हर मांगा।
जन्म जनम शिव पद अनुरागा ।।
 आगे चलकर हिमाचल के वहां पुत्री के रूप में जन्म ली 
और पुनः कठिन तपस्या करके पति के रूप में भगवान शिव को प्राप्त किया।
कथा के दौरान  श्री प्रकाश पाल , सचिन सिंह , रामनिवास उपाध्याय , वीरेंद्र मिश्र , राघवेंद्र शुक्ला , ध्रुव धर  द्विवेदी , श्याम जी मिश्रा, रवीन्द्र पाल, उदयभानपाल,पारसनाथ,
विद्यासागर मिश्र, मनोज सिंह,रतन मिश्रा, विनोद, बैजनाथ पाल, राजेश सिंह, मनोज मिश्र,साहब यादव,बीरवल, कैलाश यादव, परशुराम,रामवेलास, त्रिभुवन पाल,श्याम मिश्र, सोनू सिंह मोनू सिंह के साथ अन्य श्रद्धालु भक्तजन उपस्थित रहे।


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