शिव पार्वती की विवाह की कथा सुन झूम उठे श्रद्धालु
देवरिया।स्थानीय श्री कृष्ण इंटर कॉलेज आश्रम के प्रांगण में नव दिवसीय कथा का शुभारंभ अनंत पीठ के पीठाधीश्वर आंजनेय दास जी महाराज ने व्यास पीठ का पूजन कर किया।
अवध धाम से पधारे हुए धीरज कृष्ण शास्त्री द्वारा कथा के तृतीय दिवस
दिवस पर शिव शिव पार्वती विवाह की चर्चा करते हुए कहा कि सती के रूप में देश त्याग कर महाराज हिमाचल के वहां पुत्री के रूप में अवतरित हुई जिसकी खबर पाकर नारद बाबा हिमांचल के घर पहुंचे और और उन्होंने मां पार्वती का दर्शन किया हिमाचल और मैं के पूछने पर नारद जी ने कन्या के बारे में विस्तार पूर्वक बताया आगे चलकर पार्वती ने कठिन तपस्या की पार्वती की तपस्या देख कर सप्तर्षि आए और उन्होंने पूछा आप क्या चाहती हैं पार्वती जी ने कहा कि भगवान शिव को पति के रूप में पाना चाहती हूं दूसरी तरफ सती के रूप में मरते समय उन्होंने वरदान मांगा था प्रभु श्री राम से माता सती ने वरदान मांगा
सती मरन सन हरी बरू मांगा।
जन्म जन्म शिवपद अनुरागा।
उन्होंने कहा था कि मैं जितनी बार जन्म लूं पति के रूप में मुझे भोलेनाथ ही मिले इसीलिए प्रभु श्री राम ने भी भगवान भोलेनाथ से हाथ जोड़कर विनती किया की हे भोलेनाथ आप मेरी प्रार्थना स्वीकार कीजिए
मम विनती अब सुनहू शिव
जो मो पर निज नेह।
जाहि विवाहेउ शैलजहि
यह मांग्यो मोहि देउ।।
प्रभु की बात मानकर भगवान भोलेनाथ में विवाह करना स्वीकार करना बड़े ही धूमधाम से भगवान शिव की बारात निकली भगवान शिव की बारात बारात में ब्रह्मा विष्णु इंद्र सहित भूत प्रेत बाराती के रूप में हिमाचल के वहां प्रस्तुत हुए बाबा भोलेनाथ की विवाह धूमधाम से हुई महारानी मैंना और हिमाचल ने पार्वती का कन्यादान किया इस अवसर पर चारों तरफ से भगवान भोलेनाथ और मां पार्वती का जय जयकार होने लगा। देवता पुष्पा की वर्षा करने लगे।
के दौरान आश्रम बरहज के पीठाधीश्वर आंजनेय दास जी महाराज, प्यारे मोहन सोनी,शेषनाथ रावत, अनमोल मिश्रा,अभय पांडेय ,अंचल पाठक, हरिशंकर पांडे, रामाश्रय यादव श्याम मिश्रा,केदार बारी, रामनिवास उपाध्याय , आदित्य नारायण पांडे, प्रभु नाथ शर्मा, सुभाष यादव, नागेंद्र तिवारी, दिनेशमणित्रिपाठी, रमेश चौरसिया कौशल किशोर शुक्ला,ओमप्रकाश मिश्रा,
हरेंद्र तिवारी, प्रदीप गुप्ता,
शशिकला शर्मा, गिरिराज देवी ,माया देवी, हेमलता शर्मा , रीता यादव, वंदना यादव सुमिति गोड़ सहित अन्य श्रद्धालु जन उपस्थित रहे।























































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