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कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

मऊ जनपद के मधुबन तहसील क्षेत्र की तीन ग्राम पंचायतों लोकया, गंगऊपुर एवं भठिया में सोमवार को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह पहल इंटेल इंडिया की उस व्यापक और दूरदर्शी सोच को प्रतिबिंबित करती है, जिसके अंतर्गत समाज के विविध वर्गों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रति जागरूक बनाते हुए उसके जिम्मेदार, सुरक्षित और सार्थक उपयोग के लिए तैयार किया जा रहा है। इस पहल को शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, डिजिटल इंडिया एवं सीबीएसई के सहयोग से आगे बढ़ाया जा रहा है तथा इसका क्रियान्वयन निरमल हृदय एजुकेशनल सोसाइटी द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों को नागरिकों हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा उद्यमिता हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के बारे में जानकारी प्रदान की गई। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य आम नागरिकों, युवाओं और उभरते उद्यमियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रति संवेदनशील बनाना तथा उन्हें यह समझाना है कि इस तकनीक का उपयोग केवल नवाचार के लिए ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, नैतिकता और सामाजिक हित के साथ भी किया जाना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों को कृषि हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वित्त हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे विषयों से भी अवगत कराया गया, ताकि विभिन्न सामाजिक और पेशागत वर्ग अपने दैनिक जीवन और आजीविका में इस तकनीक की प्रासंगिकता को समझ सकें।

इस पहल का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि यह एआई प्रज्ञा तथा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जमीनी स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों के पूरक के रूप में कार्य करती है। ग्रामीण समुदायों तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बुनियादी समझ पहुँचाकर यह कार्यक्रम तकनीक और समाज के बीच की दूरी को कम करने का प्रयास करता है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि लोगों में ऐसी समझ विकसित करना है जिससे वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अवसरों, उपयोगों और संभावित प्रभावों को विवेकपूर्ण ढंग से समझ सकें।

इंटेल इंडिया की इस पहल के केंद्र में यह दृष्टि निहित है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लाभ केवल शहरी या तकनीकी रूप से सक्षम वर्गों तक सीमित न रह जाए, बल्कि ग्रामीण और वंचित समुदाय भी इससे जुड़ें, सीखें और सशक्त बनें। इसी सोच के अनुरूप यह कार्यक्रम स्थानीय संदर्भों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को सरल भाषा और व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से प्रस्तुत करता है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस परिवर्तनकारी तकनीक से जुड़ सकें।

कार्यक्रम का संचालन निरमल हृदय एजुकेशनल सोसाइटी के कार्यक्रम समन्वयक श्री शैलेश सिंह द्वारा किया गया। उन्होंने सरल, संवादात्मक और सहभागितापूर्ण शैली में प्रतिभागियों को विषय की जानकारी दी। उनके सत्रों ने विशेष रूप से युवाओं, विद्यार्थियों, किसानों, गृहिणियों और छोटे व्यवसाय से जुड़े लोगों के बीच तकनीक के प्रति जिज्ञासा, विश्वास और सीखने की सकारात्मक भावना को मजबूत किया।

ग्रामीण समुदाय ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे वर्तमान समय की आवश्यकता के अनुरूप एक उपयोगी और भविष्य उन्मुख प्रयास बताया। निरमल हृदय एजुकेशनल सोसाइटी का मानना है कि इस प्रकार के कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल जागरूकता को सुदृढ़ करने, तकनीक के प्रति भरोसा विकसित करने तथा युवाओं और समुदायों को भविष्य की संभावनाओं के लिए तैयार करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। संस्था आगे भी ऐसे प्रयासों के माध्यम से समाज के व्यापक वर्गों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।


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