ट्रेक्टरों से टोचन करके नदी पार किसान हर वर्ष ले जाते हैं कम्बाइन, कई वर्षों से हो रही पीपा पुल की मांग
देवरिया।लार क्षेत्र के महाल मंझरिया गांव का रकबा सबसे बड़ा है। गांव के पास से गुजरी सरयू नदी दो पाट में बंटी है। बीच के करीब हजारों एकड़ जमीन पर तटवर्ती गांव के अलावा बलिया व बिहार प्रांत के सिवान जिले के किसान गेहूं की खेती करते हैं।
लार क्षेत्र के नदौली में किसानों के कई वर्ष के संघर्ष के बाद सरयू के पाट पर पीपा पुल बनाये जाने की घोषणा हुई थी। आधा मार्च बीत गया। फसल पकने में मात्र एक पखवारा का समय है। दियारा क्षेत्र में गेहूं की बोई गयी फसल पहली अप्रेल तक कटने योग्य हो जायेगी। अब किसानों को फिर चिंता सताने लगी की उस पार कम्बाइन कैसे जायेगी और अनाज कैसे घर आएगा। अभी तक पीपा पुल बनने का काम नहीं शुरू हुआ।
गत वर्ष पीडब्ल्यूडी विभाग के अफसरों से सर्वे कर लिया था। इसके प्रस्ताव को स्वीकृति भी मिल गई थी। बोला गया था कि नदी मेंं पानी सामान्य होने के बाद पीपा का पुल लगाया जाएगा। अभी तक इस प्रकरण में सुस्ती समझ में नहीं आ रही।
भागलपुर से निकली सरयू नदी पिंडी, महाल मंझरिया, कौसड़, खेमादेई, चुरिया, नदौली, करचो, मेहरौना होते हुए दो पाट में बहती है। सलेमपुर तहसील के लार ब्लॉक के 20 गांवों के किसान नदी के दोनों पाट के बीच वाले सैकड़ों एकड़ जमीन पर खेती करते हैं। इसमें बलिया जिले के डुहा, विहरा, कठौड़ी और बिहार के सिवान जिले के ग्यासपुर, मइरीटाल, डुमरहर आदि गांव के किसान भी शामिल हैं।
संसाधन व सुविधा नहीं मिलने के कारण सिर्फ गेहूं की फसल बोते हैं, मगर मड़ाई के समय नदी में पानी बढ़ने पर कंबाइन और ट्रैक्टर-ट्राॅली उस पार नहीं पहुंच पाता है। इसके चलते कभी-कभी गेहूं की फसल बर्बाद हो जाती है और किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ता है। इसको लेकर किसान कई बार आंदोलन कर चुके हैं और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से भी मांग की थी।
शासन ने इसका संज्ञान लिया था और सरयू नदी पर नदौली गांव के सामने पीपा का पुल बनाने के लिए स्थान चिन्हित किया था । अब गेहूं की फसल की मड़ाई का समय आ गया लेकिन पीपा पुल का कहीं पता नहीं।

























































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