US–Iran War: ईरानी युद्धपोत पर हमले को लेकर भारत सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ईरान का दावा था कि यह जहाज “भारतीय नौसेना का मेहमान” था और उस पर बिना किसी चेतावनी के हमला किया गया। हालांकि Indian Navy और भारत सरकार ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय अधिकारियों ने साफ कहा है कि 25 फरवरी को भारतीय जलक्षेत्र छोड़ने के बाद यह जहाज भारत का मेहमान नहीं था और इस घटना से भारत का कोई संबंध नहीं है।
16 से 25 फरवरी तक विशाखापत्तनम में रहा जहाज
जानकारी के मुताबिक IRIS Dena ने 16 से 25 फरवरी तक Visakhapatnam में आयोजित International Fleet Review में हिस्सा लिया था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद 25 फरवरी को जहाज भारत से रवाना हो गया।
इसके बाद 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आधिकारिक घोषणा हुई। सूत्रों के अनुसार युद्ध शुरू होने के बाद ईरानी जहाज ने भारत से किसी प्रकार की मदद नहीं मांगी और जब उस पर हमला हुआ, तब वह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मौजूद था।
वर्जीनिया क्लास पनडुब्बी से हुआ हमला
बताया जा रहा है कि अमेरिका की Virginia-class submarine ने 4 मार्च को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इस जहाज पर हमला किया। हमले के बाद जहाज तेजी से डूबने लगा।
डूबने से पहले सुबह 5:08 बजे जहाज ने Sri Lanka Navy को संकट संदेश (Distress Signal) भेजा। श्रीलंका के अधिकारियों के अनुसार इस हादसे में कम से कम 87 ईरानी नाविकों की मौत हो गई, जबकि 32 लोगों को बचाकर Galle के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल लापता लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव
इस घटना के बाद Middle East में तनाव चरम पर पहुंच गया है। Iran और United States के बीच पुराना विवाद अब खुली सैन्य टकराव में बदलता दिखाई दे रहा है।
ईरान ने हमले के बाद Israel और अमेरिकी ठिकानों पर नए सिरे से हमले शुरू कर दिए हैं। वहीं इजराइल ने भी Tehran को निशाना बनाते हुए जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है।
भारत ने रखा तटस्थ रुख
भारत सरकार ने साफ किया है कि यह जहाज केवल एक नियमित नौसैनिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आया था और तय समय पर वापस लौट गया था। इसलिए इस घटना से भारत का कोई संबंध नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते भारत द्वारा दिया गया यह स्पष्टीकरण देश को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय विवाद में घसीटे जाने से बचा सकता है। साथ ही हिंद महासागर में शांति और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को देखते हुए Indian Navy क्षेत्र में अपनी निगरानी और गश्त बढ़ा सकती है।
GGS NEWS 24

























































Leave a comment