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जिस आरोप में बर्खास्त इंस्पेक्टर उसी आरोप में बरी

 देवरिया। देवरिया के भटनी थाना में 3 वर्ष पूर्व तैनात रहे थाना प्रभारी भीष्म पाल सिंह यादव के विरुद्ध छेड़खानी और पॉक्सो एक्ट में दर्ज केस में गुरुवार को अदालत ने फैसला सुनाया। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो राकेश पटेल की अदालत ने आरोपी के विरुद्ध अभियोजन की ओर से समुचित साक्ष्य नहीं दिए जाने के कारण दोष मुक्त कर दिया। घटना के बाद निरीक्षक भीष्म पाल सिंह के खिलाफ 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। इसी आरोप में उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था।
भटनी थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी एक किशोरी अपनी मां के साथ 22 जून 2020 को दिन में 12 बजे थानाध्यक्ष भीष्म पाल सिंह के पास भूमि विवाद से संबंधित मामले शिकायत लेकर गई थी। भीष्म पाल सिंह ने किशोरी को अपने साइड में बैठने को कहा और अश्लील हरकत करने लगे किशोरी ने आरोपी निरीक्षक का वीडियो अपने मोबाइल से बना लिया था। जो बाद में वायरल हो गया। थाना में अश्लील हरकत किए जाने का वीडियो वायरल होने की जानकारी उच्चाधिकारियों को होने के बाद निरीक्षक के विरुद्ध धारा 166, 354 509 आईपीसी में मुकदमा दर्ज हुआ। विवेचना में वादिनी के नाबालिग पाए जाने पर धारा 7/8 पाक्सो एक्ट की धारा भी बढ़ा दी गई। इस दौरान आरोपी इंस्पेक्टर फरार हो गया। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस अधीक्षक श्रीपति मिश्र को 25 हजार रुपये का इनाम घोषित करना पड़ा था।
विवेचक सीओ भाटपाररानी पंचम लाल यादव ने भीष्म पाल सिंह के विरुद्ध आरोप पत्र प्रेषित किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोप पत्र में नामित विभागीय साक्षी महिला कांस्टेबल पूजा यादव, वर्षा सिंह, तत्कालीन कांस्टेबल मोहर्रिर श्यामशेर यादव, महिला कांस्टेबल गुंजन यादव सहित कांस्टेबल राकेश कुमार यादव और ज्येष्ठ वैज्ञानिक सहायक विधि विज्ञान प्रयोगशाला रामनगर वाराणसी अपने बयान से मुकर गए। विधि विज्ञान प्रयोगशाला के ज्येष्ठ वैज्ञानिक सहायक भी यह नहीं बता पाए कि यह वीडियो कब बना था। ऐसे में अभियोजन की ओर से समुचित और पर्याप्त साक्ष्य नहीं दिए जाने के कारण अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया।


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