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शुकदेवजी द्वारा परीक्षित को उपदेश की कथा

देवरिया।रूद्रपुर टैक्सी स्टैंड रोड पर विवेकानंद तिवारी के निज निवास पर चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के दौरान कथा के तृतीय दिवस पर वृंदावन धाम से पधारे हुए कथा व्यास राघवेंद्र शास्त्री ने कथा का रसपान कराते हुए बताया कि सुखदेव जी द्वारा महाराज परीक्षित को उपदेश-आसन,श्वास,संग और इन्द्रियों को जीत कर बुद्धि के द्वारा मन को भगवान के स्थूल रूप में लगाना।एज श्रृष्टि क्रम का वर्णन, ब्रह्मा की संकल्प सृष्टि,चार ऋषियों को प्रकट करना, दश ऋषियों, छाया से कर्दम जी, वाणी से सरस्वती, वाम भाग से सतरूपा दक्षिण भाग से मनु को प्रकट करना।मनु की पांच संतान देवहूति, आकूति, प्रसूति नाम की तीन कन्याएं, उतानपाद और प्रियव्रत नाम के दो पुत्र। देवहूति का कर्दम  से विवाह, पुत्र रूप में कपिल भगवान का जन्म , देवहूति माता को सांख्य दर्शन का उपदेश, आकूति का रुचि प्रजापति से विवाह, प्रसूति का दक्ष प्रजापति से विवाह कन्या के रूप सती का जन्म शिव से विवाह,दक्ष यज्ञ विध्वंस, ध्रुव चरित्र,अंग , वेन पृथु,प्राचीनबरही का चरित्र, प्रियव्रत, ऋषभ, जड़भरत का चरित्र नार्को का वर्णन, अजामिल प्रसंग, वृत्रासुर का चरित्र,प्रहलाद चरित्र एक कथा विस्तार पूर्वक कहा।
कथा के दौरान मुख्य यजमान विवेकानंद तिवारी, उषा तिवारी,नित्यानंद तिवारी, संपूर्णानंद तिवारी, कृपानंद तिवारी, श्रद्धानंद तिवारी, सहित अन्य श्रद्धालु भक्तजन उपस्थित है। 


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