आजमगढ़ के फूलपुर का था मारा गया इनामी बदमाश वाकिफ, वर्ष 2015 से शुरू की थी अपराध की राह, बन बैठा था कुख्यात अपराधी
आजमगढ़।जिले के रौनापार थाना के जोकहरा पुल के पास एसटीएफ, स्वाट टीम और सिधारी पुलिस की संयुक्त मुठभेड़ में मारा गया ₹50 हजार का इनामी बदमाश वाकिफ आजमगढ़ के ही फूलपुर का रहने वाला था। आखिर कौन था वाकिफ और कैसे बन गया वह अपराध की दुनिया का कुख्यात नाम, आपको हम बताते हैं।
पुलिस रिकार्ड के मुताबिक मुठभेड़ में मारा गया बदमाश वाकिफ उर्फ वाकिब, पुत्र कलाम उर्फ सलाम, मूल रूप से थाना फूलपुर क्षेत्र का निवासी था। उसके पिता फेरी का काम करते हैं। वाकिफ ने वर्ष 2015 में अपराध की दुनिया में कदम रखा। उस पर पहला मुकदमा आजमगढ़ के फूलपुर थाने में पशु तस्करी के मामले में दर्ज हुआ था। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा और जल्द ही उसने अपना गैंग बना लिया। वर्ष 2020 में गोरखपुर पुलिस ने पहली बार गैंगस्टर एक्ट में पाबंद किया। उसके ऊपर कुल 44 मुकदमे दर्ज है।
वाकिफ का गैंग पशु चोरी और गोवंश की अवैध तस्करी में सक्रिय था। गैंग में अरशद, राकेश उर्फ राका, जावेद, मेराज, सुरेंद्र यादव, शहजादे उर्फ छेदी, मोहम्मद आकिल, हसीम उर्फ शेरू और शकील उर्फ भीमा जैसे अपराधी शामिल थे। पुलिस के अनुसार वाकिफ बेहद शातिर था और नेपाल बॉर्डर के रास्ते गोवंश की तस्करी का नेटवर्क चलाता था।
दो वर्ष पूर्व 2023 में उसका नाम गोरखपुर के एक गो-तस्करी कांड में सामने आया, जिसके बाद उस पर ₹50 हजार का इनाम घोषित किया गया। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि वाकिफ अपनी पहचान छिपाने के लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करता था और पूरी तरह गुप्त तरीके से गिरोह को संचालित करता था।
वाकिफ की तलाश में लंबे समय से एसटीएफ की टीमें लगी थीं। शुक्रवार की तड़के एसटीएफ के एसपी डी.के. शाही के नेतृत्व में लखनऊ एसटीएफ, आजमगढ़ स्वाट टीम और सिधारी पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान जोकहरा पुल के पास मुठभेड़ हुई, जिसमें वाकिफ मारा गया जबकि उसके तीन साथी फरार हो गए। पुलिस फरार अपराधियों की तलाश में कॉम्बिंग ऑपरेशन जारी रखे हुए है।























































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