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रसूल-ए खुदा की बेटी जनाबे फातिमा की यौमे विलादत की याद में महफिलों का आयोजन

फूलपुर। रसूल-ए खुदा की बेटी जनाबे फातिमा की यौमे विलादत की याद में बुधवार को फूलपुर और ग्रामीण इलाकों के शिया बाहुल्य क्षेत्रो में महफिलों का आयोजन किया गया। इस दौरान महिलाओ ने फ़ातिमा की शान में कसीदे पढ़े। मजलिसे आयोजित की गई। महफ़िलो में ज़ाकिरा ने कहा कि फ़ातिमा ज़हरा के किरदार को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाये।
उर्दू के मशहूर शायर कैफी आज़मी के पैतृक गांव मेजवां स्थिति सैयद अली अंसर के आवास पर महिलाओं ने फ़ातिमा की शान में महफ़िल का आयोजन किया । इसमे जनाबे फ़ातिमा की शान में कसीदे पेश किए गए। महफ़िल स्थल को रंगीन कपड़ो से खूब सजाया और सवारा गया था। शुरुआत नुजहत, कहकशा, नायाब ने कुरान पाक की तिलावत से किया। सरवत बानो, फरहाना, मुस्कान, बिलकीस जमाल, कहकशा, निदा, सलमा बानो, महविश, फलक, इन्नीमा, गुलज़ार, आरज़ू, खूबी, शगुफ्ता, सलमा खातून, द्रकशह:, रेशमा ने फ़ातिमा की शान में कसीदा पेश किया। लाडली बानो और नुजहत ने सभी खवातीनो का शुक्रिया पेश किया। इस क्रम में दसमडा गांव में सैयद मोहम्मद हाशिम के आवास पर जनाबे फ़ातिमा की याद में महफ़िल सजाई गई। जिसमें महिलाओं ने फ़ातिमा की शान में कसीदे सुनाए। ज़ाकिरा कनीज़ फातिमा ने कहा कि खवातीन रसूल की इस बेटी के किरदार को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाएं । रसूल की बेटियों में फातिमा का स्थान अहम है। उन्होंने अपने दोनों बेटों हसन और हुसैन की जिस तरह से परवरिश की है। मुसलमान औरतों को भी अपने बच्चों की परवरिश उसी तरह करनी चाहिए।


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