सीज क्लीनिक में फिर चला मौत का कारोबार प्रसव के बाद महिला की मौत, बच्चे हुए अनाथ
•अवैध क्लीनिक पर प्रशासन की मिलीभगत का आरोप डेढ़ साल बाद भी जारी खेल, महिला की मौत से मचा हड़कंप।
•प्रसूता की मौत के मामले में अस्पताल संचालिका प्रियंवदा मौर्या उर्फ संगीता मौर्या समेत सहयोगियों पर दो-दो एफआईआर, फिर भी गिरफ्तारी नहीं।
अंबेडकरनगर जिले के जहांगीरगंज क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित एक सील नर्सिंग होम में प्रसूता की तबीयत बिगड़ने और बाद में मेडिकल कॉलेज ले जाते समय मौत हो जाने के मामले ने अब बड़ा रूप ले लिया है। सुबह प्रसव पीड़ा के बाद भर्ती कराई गई महिला की मौत के बाद परिजनों में कोहराम मच गया, वहीं अब इस पूरे प्रकरण में नर्सिंग होम संचालिका प्रियंवदा मौर्या उर्फ संगीता मौर्या और उसके सहयोगियों के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर ली गई हैं।बताया जा रहा है कि राजेसुल्तानपुर थाना क्षेत्र के केदरूपुर गांव निवासी संदीप कुमार की 34 वर्षीय पत्नी राजकला को रविवार सुबह प्रसव पीड़ा होने पर जहांगीरगंज बाजार स्थित दिव्यांशु हेल्थ केयर सेंटर में भर्ती कराया गया था। सुबह करीब 10 बजकर 40 मिनट पर राजकला ने बच्चे को जन्म दिया, लेकिन दोपहर लगभग 1 बजे अचानक उसकी हालत बिगड़ने लगी। परिजनों का आरोप है कि गलत इलाज और लापरवाही के चलते प्रसूता की स्थिति गंभीर हुई। जब हालत ज्यादा नाजुक हो गई तो नर्सिंग होम संचालिका ने हाथ खड़े कर दिए, जिसके बाद परिजन उसे मेडिकल कॉलेज सदरपुर लेकर पहुंचे, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
सुबह हुई इस दर्दनाक घटना के बाद नर्सिंग होम संचालिका के हाथ-पांव फूलने लगे। परिजनों को मनाने और समझौते की कोशिशें भी शुरू हुईं, लेकिन बात नहीं बन सकी। बताया जा रहा है कि कुछ रसूखदार लोग भी संचालिका के बचाव में अंदरखाने सक्रिय हो गए, मगर मृतका के परिजनों ने समझौते से साफ इनकार कर दिया और पुलिस को तहरीर दे दी।मामले की गंभीरता को देखते हुए जहांगीरगंज थाने में मृतका के पति संदीप कुमार पुत्र हीरालाल की तहरीर पर नर्सिंग होम संचालिका प्रियंवदा मौर्या उर्फ संगीता मौर्या तथा उसके तीन-चार अन्य सहयोगियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या समेत विभिन्न आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं दूसरी ओर जहांगीरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉक्टर कमलेश की तहरीर पर दिव्यांशु नर्सिंग होम की संचालिका के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और मेडिकल एक्ट की धाराओं में दूसरा मुकदमा भी दर्ज किया गया है। हालांकि दो-दो एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अब तक मुख्य संचालिका की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि जहां कल प्रसूता की हालत बिगड़ने की घटना हुई, उसी दिव्यांशु हेल्थ केयर सेंटर को जुलाई 2024 में तत्कालीन अधीक्षक द्वारा निरीक्षण के दौरान अवैध पाए जाने पर सील किया गया था। उस समय संचालिका संचालन से जुड़े कोई वैध दस्तावेज नहीं दिखा सकी थी। इसके बावजूद विभागीय अनदेखी या मिलीभगत के कारण सील होने के बाद भी वहां इलाज और ऑपरेशन का काम चलता रहा और मरीजों की आवाजाही भी जारी रही।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, आलापुर थाना क्षेत्र के हथिनाराज गांव निवासी प्रियंवदा मौर्या उर्फ संगीता मौर्या पत्नी नंदकिशोर मौर्य लंबे समय से जहांगीरगंज में अवैध रूप से नर्सिंग होम का संचालन कर रही थी। यह भी चर्चा है कि प्रियंवदा पहले आशा बहू के रूप में कार्य कर चुकी है। शिकायतों के बाद जब उसकी संविदा समाप्त हुई तो उसने जहांगीरगंज में यूनियन बैंक के ऊपर किराये के भवन में दिव्यांशु हेल्थ केयर सेंटर के नाम से नर्सिंग होम संचालन शुरू कर दिया।
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे, जहां सामान जब्ती की कार्रवाई भी की गई। उधर पुलिस ने मृतका के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अंबेडकरनगर शव विच्छेदन गृह भेज दिया है।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब नर्सिंग होम पहले से सील था, तो फिर वहां इलाज और प्रसव कैसे होता रहा? आखिर किसकी शह पर यह अवैध कारोबार चलता रहा? और दो मुकदमे दर्ज होने के बाद भी मुख्य संचालिका की गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हो सकी।



























































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