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रेशम सखी के रूप में रेशम कीट पालन करेंगी ,स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं

लखनऊ: 08 अक्टूबर राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों को  रेशम उत्पादन से जोड़ते हुए रेशम क्लस्टर विकसित किये जायेंगे । समूहों के मध्य से रेशम सखियों का चयन कर उन्हें  प्रशिक्षित किया जायेगा । इस तरह  स्वयं सहायता समूहों की दीदियां रेशम विभाग से जुड़कर रेशम कीट पालन करेंगी और रेशम सखी के रूप में काम करके अपनी आमदनी बढ़ायेंगी।इस कार्य को मूर्तरूप प्रदान करने के लिए उप मुख्यमंत्री  केशव प्रसाद मौर्य ने सम्बन्धित विभागों के अधिकारियों को व्यापक दिशा-निर्देश दिए हैं।उप मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन एवं रेशम विभाग द्वारा  स्वयं सहायता समूह की सदस्यों को  रेशम उत्पादन से जोड़ने हेतु अनुबंध  किया जा चुका है।

इस मसौदे व अनुबंध की अमलीजामा पहनाने की कार्यवाही चल रही है।शहतूत रेशम कीट पालन पर समझ विकसित करने हेतु 14 सदस्यीय दल जिसमें राज्य, जनपद एवं ब्लॉक स्तरीय मिशन प्रोफेशनल सम्मिलित हैं,को  तीन दिवसीय एक्सपोज़र विज़िट केंद्रीय रेशम अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, मैसूर, कर्नाटक में आयोजित किया जा चुका है। 

तसर रेशम कीट पालन पर समझ विकसित करने हेतु जनपद सोनभद्र से 17 सदस्यीय दल ,जिसमें रेशम सखी एवं मिशन स्टाफ़ सम्मिलित हैं, को   तीन दिवसीय एक्सपोज़र विज़िट केंद्रीय तसर अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, राँची, झारखंड में आयोजित किया जा चुका है।

राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मिशन निदेशक  दीपा रंजन ने बताया कि वित्तीय वर्ष 25-26 की वार्षिक कार्ययोजना में रेशम उत्पादन पर कार्य करने हेतु समूह सदस्यों को आच्छादित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।इस कार्यक्रम के अंतर्गत समूह की महिलाओं को मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना से जोड़ने हेतु रेशम विभाग द्वारा मिशन स्टाफ का उन्मुखीकरण आयोजित किया गया एवम योजना में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर योजना से जोड़ने के निर्देश दिये गयेlअब तक 100 से अधिक स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को मुख्यमन्त्री रेशम विकास योजना के अंतर्गत चयन किया जा चुका है,जिसमें से 30 समूह की महिलाओं को योजना के अंतर्गत लाभान्वित किया जा चुका है l


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