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विजेथुआ महोत्सव के पाँचवें दिन बोले — संत समाज के शोधक, उनके अभाव से बढ़ी कुरीतियाँ

“संतों ने गाँव छोड़ा तो विसंगतियां बढ़ने लगीं” — जगद्गुरु रामभद्राचार्य
कादीपुर सुलतानपुर । विजेथुआ धाम में चल रहे वाल्मीकि रामायण कथा महोत्सव के पाँचवें दिन मंगलवार को जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि “संत समाज के शोधक होते हैं, संतों से समाज की कुरीतियाँ दूर होती हैं। जब संतों ने गाँव छोड़ा तो विसंगतियां बढ़ने लगीं।”

उन्होंने कहा कि संत जब तक गाँव-गाँव में रहते थे, तब तक वहाँ सच्चरित्रता, सेवा और संस्कार का वातावरण रहता था। आज भौतिकता के युग में लोग संतों से दूर हो गए हैं, इसलिए समाज में स्वार्थ, कलह और नैतिक पतन बढ़ा है। जगद्गुरु ने श्रोताओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में संत-सानिध्य और सत्संग को अपनाएँ, तभी समाज में मर्यादा और सद्भाव बना रह सकता है।

कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्शों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। जो अपने कर्म में निष्ठा और आचरण में मर्यादा रखता है, वही सच्चे अर्थों में मानव कहलाता है।

व्यासपीठ का माल्यार्पण एमएलसी शैलेंद्र सिंह, विधायक राजेश गौतम, आईएएस तुलेश्वर प्रसाद (वित्त मंत्रालय), राकेश तिवारी (भारतीय राजदूत, स्वीडन), डॉ. सीताशरण तिवारी, रामार्य पाठक, ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह, सुशील पांडेय, राजेश तिवारी, अम्बरीश मिश्र, हरिओम निषाद, और राजेश सिंह ने किया। कथा स्थल पर “जय श्रीराम” के गगनभेदी उद्घोषों से पूरा वातावरण राममय हो उठा।


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