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करंट की चपेट में आने से युवक की दर्दनाक मौत, परिवार में मचा कोहराम

 मल्हनी। सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के कोठवार घनघनुवा गांव में मंगलवार देर रात एक दर्दनाक हादसे में 29 वर्षीय युवक गुलशन की मौत हो गई। गुलशन गिरधरपुर गांव में बिजली की का जंफर जोड़ने गया था, जहां वह करंट की चपेट में आ गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा उस वक्त हुआ जब वह रात के अंधेरे में निजी स्तर पर बिजली व्यवस्था सुधारने का प्रयास कर रहा था। इस घटना ने पूरे गांव को झकझोर दिया है और मृतक के घर में कोहराम मच गया है।

 सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के कोठवार घनघनुवा गांव के निवासी दयाराम का सबसे छोटा पुत्र गुलशन (29) निजी तौर पर बिजली से जुड़े कार्य करता था। मंगलवार की रात वह पास के गांव गिरधरपुर गया था जहां उसे जंफर जोड़ने का कार्य करना था। ग्रामीणों ने बताया कि गुलशन जंफर जोड़ते समय अचानक हाई वोल्टेज करंट की चपेट में आ गया जिससे उसका एक हाथ बुरी तरह झुलस गया और वह मौके पर ही अचेत होकर गिर पड़ा। आसपास के लोग जब तक मौके पर पहुंचे, तब तक उसकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी। आनन-फानन में उसे पास के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।उधर बुधवार सुबह हादसे की सूचना मिलते ही बुधवार सुबह सरायख्वाजा पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। थाना प्रभारी विनय प्रकाश सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि "प्रथम दृष्टया जांच में पाया गया है कि युवक को करंट एक हाथ से लगा जिससे वह बुरी तरह झुलस गया था। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल घटना के सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है।"

 

शादी के एक साल बाद ही टूटा जीवनसाथी का साथ

मल्हनी। गुलशन का विवाह पिछले वर्ष सोंगर गांव के चंद्रभान की पुत्री महिमा नामक युवती से हुआ था। शादी को अभी केवल एक साल ही बीता था कि यह दुर्भाग्यपूर्ण हादसा हो गया। गुलशन की पत्नी इस खबर को सुनते ही बेसुध हो गई और लगातार रोते हुए वह बार-बार यही कहती रही कि "मेरे सुहाग को क्यों छीन लिया।" अभी तक दोनों के कोई संतान नहीं थी। शादीशुदा जीवन की शुरुआत के इतने कम समय में ही उसका अंत हो जाना पूरे गांव को स्तब्ध कर गया।

भाई-बहनों में सबसे छोटा था गुलशन

मल्हनी। गुलशन चार भाइयों और दो बहनों में सबसे छोटा था। सभी भाई-बहनों की शादी हो चुकी है। परिवार में सबसे दुलारा और मेहनती माने जाने वाले गुलशन को हर कोई पसंद करता था। घर की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी, इसी कारण गुलशन छोटे-मोटे बिजली के काम करके रोज़ी-रोटी चलाता था। वह काफी मिलनसार और सहयोगी स्वभाव का था, जो हर किसी की मदद को तत्पर रहता था।


बिजली विभाग की लापरवाही भी सवालों के घेरे में

मल्हनी। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अक्सर गांवों में बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिजली मरम्मत के कार्य कराए जाते हैं। कई बार लोग अपनी जान जोखिम में डालकर निजी स्तर पर इन कार्यों को करते हैं क्योंकि विभागीय जिम्मेदारियां समय पर पूरी नहीं होतीं। गांव में बिजली की खराबी कई दिनों से बनी हुई थी, और गुलशन को निजी तौर पर बुलाया गया था ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बिजली विभाग या स्थानीय प्रशासन को इन स्थितियों के लिए जवाबदेह नहीं ठहराया जाना चाहिए,गुलशन की मौत की खबर जैसे ही गांव में फैली, चारों तरफ मातम छा गया। घर पर लोगों का तांता लग गया। हर आंख नम थी और हर कोई गुलशन के व्यक्तित्व की तारीफ कर रहा था। "बहुत मेहनती और शांत लड़का था गुलशन, कभी किसी से ऊंची आवाज में बात नहीं करता था," एक बुजुर्ग ग्रामीण ने कहा। वहीं, गुलशन के माता-पिता की स्थिति बेहद दयनीय है। जवान बेटे की इस तरह की मौत ने उन्हें भीतर से तोड़ दिया है। पिता दयाराम तो लगातार बेहोश हो जा रही हैं और पिता सिर्फ बेटे की तस्वीर को देखते हुए आंसू बहा रहे हैं।


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