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इंडिगो की 400 फ्लाइट रद्द 3 लाख यात्री परेशान, सरकार ने नियमों में दी राहत

नई दिल्ली: इंडिगो एयरलाइंस की करीब 400 फ्लाइटें आज रद्द होने से देशभर के हवाई अड्डों पर हाहाकार मच गया है। इन उड़ानों के रद्द होने से लगभग 3 लाख यात्री प्रभावित हुए हैं, जिनमें कई यात्रियों को 12 से 14 घंटे तक इंतजार करना पड़ा। राजधानी दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई एयरपोर्ट पर लंबी कतारें देखने को मिलीं, और लोग अपनी फ्लाइट की जानकारी के लिए एयरलाइन काउंटर पर भीड़ जमा किए बैठे रहे।
इंडिगो की फ्लाइट रद्द होने के कारणों को लेकर फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट एसोसिएशन (FIP) ने बयान जारी किया। संगठन ने स्पष्ट किया कि हाल की उड़ान रद्द की घटनाओं के लिए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट (FDTL) जिम्मेदार नहीं है, बल्कि असली वजह एयरलाइन की लंबे समय से चली आ रही कम स्टाफ रणनीति है, विशेषकर फ्लाइट ऑपरेशंस विभाग में।
FIP ने कहा कि एयरलाइंस को FDTL के नियम लागू होने से पहले दो साल की तैयारी का समय था, लेकिन इंडिगो ने भर्ती पर रोक रखी और कई नॉन-पॉचिंग समझौते किए। पायलटों के वेतन में वृद्धि नहीं की गई और कई ऐसे अल्पदर्शी फैसले लिए गए, जिनका असर आज यात्रियों और कर्मचारियों पर पड़ा।
1 जुलाई 2025 को FDTL का फेज-1 और 1 नवंबर 2025 को फेज-2 लागू किया गया था। इसके बाद इंडिगो ने पायलट की छुट्टियों को कम किया और बाद में उन्हें वापस खरीदने की कोशिश की। इस प्रक्रिया से कर्मचारियों का मनोबल गिरा और उड़ानों में व्यवधान बढ़ा।
सरकार ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने आदेश दिया कि एयरलाइन को तुरंत नियमों में राहत दी जाए ताकि हवाई यात्रा सामान्य हो सके। DGCA ने स्पष्ट किया कि यदि एयरलाइन समय पर सुधार नहीं करती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपने टिकट की पुष्टि और नई फ्लाइट के समय की जानकारी एयरलाइन की वेबसाइट या मोबाइल ऐप से प्राप्त करें। कई यात्री पहले से ही होटल और परिवहन की वैकल्पिक व्यवस्था कर रहे है
विशेषज्ञों का मानना है कि इंडिगो की स्टाफ कमी और पायलट प्रबंधन की गलत रणनीतियों के कारण ही यह संकट पैदा हुआ। एयरलाइन को कर्मचारियों के साथ बेहतर तालमेल और योजनाबद्ध भर्ती प्रक्रिया अपनाने की सख्त जरूरत है।
इस संकट ने देशभर में हवाई यात्रा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि सरकार की त्वरित राहत और DGCA के हस्तक्षेप से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले कुछ दिनों में उड़ानों का संचालन सामान्य हो जाएगा और यात्रियों की मुश्किलें कम होंगी।


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