भारत का डबल धमाका! दो नए स्टील्थ फ्रिगेट से थर्राएगा हिंद महासागर, चीन-पाक पर कड़ी नजर
भारत।बढ़ते समुद्री तनाव और बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच भारत अपनी नौसैनिक क्षमता और आत्मनिर्भरता को नए आयाम देने जा रहा है। 26 अगस्त को भारतीय नौसेना एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करेगी, जब पहली बार दो स्वदेश निर्मित अगली पीढ़ी के स्टील्थ फ्रिगेट—आईएनएस उदयगिरि (F35) और आईएनएस हिमगिरि (F34)—एक साथ बेड़े में शामिल किए जाएंगे।
ऑपरेशनों के लिए सक्षम बनाती
करीब 6,700 टन वज़नी ये युद्धपोत पिछली श्रेणी के मुकाबले बड़े और तकनीकी रूप से अधिक उन्नत हैं। इनका स्टील्थ डिज़ाइन इन्हें दुश्मन के रडार से लगभग अदृश्य बनाता है, जिससे संभावित संघर्षों में नौसेना को बढ़त मिलेगी। दोनों फ्रिगेट्स में सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइलें, वायु-रोधी और पनडुब्बी-रोधी हथियारों का मजबूत जखीरा मौजूद है। साथ ही, अत्याधुनिक रडार, सोनार और हेलीकॉप्टर संचालन क्षमता इन्हें बहुआयामी ऑपरेशनों के लिए सक्षम बनाती है।
क्षमता को और मजबूत करेंगे
ये जहाज केवल नए हथियार प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती नौसैनिक शक्ति और तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन श्रीलंका, मालदीव और अफ्रीका के बंदरगाहों के जरिये अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है, जबकि पाकिस्तान ग्वादर में चीनी नौसैनिक गतिविधियों को पनाह दे रहा है। ऐसे में, उदयगिरि और हिमगिरि भारत को अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और मलक्का स्ट्रेट जैसे रणनीतिक जलमार्गों पर निगरानी और नियंत्रण की क्षमता को और मजबूत करेंगे।
डिजाइन और निर्मित किए गए
दुनिया के बड़े हिस्से का व्यापार इन समुद्री रास्तों से गुजरता है, और इन फ्रिगेट्स की तैनाती से भारत किसी भी खतरे का तेजी से जवाब देने में सक्षम होगा। साथ ही, यह कदम प्रधानमंत्री के “आत्मनिर्भर भारत” विजन को भी मजबूती देगा, क्योंकि दोनों युद्धपोत देश में ही डिजाइन और निर्मित किए गए हैं।
भारत की स्थिति को और सुदृढ़ कर देगा
इन जहाजों का शामिल होना सिर्फ नौसैनिक बेड़े का विस्तार नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी है—भारत अपने समुद्री हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है। 26 अगस्त को यह “डबल धमाका” हिंद महासागर में भारत की स्थिति को और सुदृढ़ कर देगा।



















































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