गांधी जयंती : सत्य और अहिंसा के पुजारी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी
नई दिल्ली।आज 2 अक्टूबर को पूरे भारत में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 156वीं जयंती बड़े ही श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जा रही है। महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान और सत्य-अहिंसा की विचारधारा ने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को नई दिशा दी।
सादगी और आत्मनिर्भरता का प्रतीक
गांधी जी का जीवन सादगी और अनुशासन का प्रतीक था। वे स्वदेशी वस्त्र और खादी के प्रचारक थे। उन्होंने चरखे को आत्मनिर्भरता और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतीक बनाया। उनका मानना था कि जब तक भारत के गाँव आत्मनिर्भर नहीं होंगे, तब तक सच्ची आज़ादी अधूरी रहेगी।
प्रमुख आंदोलन और उनकी तिथियाँ
गांधी जी ने सत्याग्रह और अहिंसा के बल पर कई बड़े आंदोलन चलाए, जिन्होंने ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी।
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असहयोग आंदोलन (1920 – 1922)
- गांधी जी ने देशवासियों से विदेशी वस्त्रों, विद्यालयों और सरकारी पदों का बहिष्कार करने का आह्वान किया।
- इसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन को नैतिक और आर्थिक रूप से कमजोर करना था।
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नमक सत्याग्रह / दांडी मार्च (12 मार्च – 6 अप्रैल 1930)
- गांधी जी ने 78 सत्याग्रहियों के साथ साबरमती आश्रम से दांडी (गुजरात) तक 390 किलोमीटर लंबी यात्रा की।
- 6 अप्रैल 1930 को उन्होंने समुद्र तट पर नमक बनाकर अंग्रेज़ों के नमक कानून को तोड़ा।
- यह आंदोलन पूरे भारत में जनजागरण का प्रतीक बना।
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भारत छोड़ो आंदोलन (8 अगस्त 1942)
- मुंबई के गोवालिया टैंक मैदान से गांधी जी ने “करो या मरो” का नारा दिया।
- इस आंदोलन ने स्वतंत्रता संग्राम को निर्णायक मोड़ दिया और अंततः 1947 में भारत को आज़ादी मिली।
सामाजिक सुधार में भूमिका
गांधी जी केवल स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि समाज सुधारक भी थे। उन्होंने छुआछूत और जातिगत भेदभाव के खिलाफ आवाज़ उठाई। उन्होंने दलितों को "हरिजन" नाम देकर समाज की मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया।
वैश्विक प्रेरणा
गांधी जी के अहिंसा और सत्याग्रह के विचारों से मार्टिन लूथर किंग जूनियर (अमेरिका), नेल्सन मंडेला (दक्षिण अफ्रीका) जैसे विश्व नेता भी प्रेरित हुए। उनके सिद्धांत आज भी शांति और न्याय की राह दिखाते हैं।
आज का महत्व
गांधी जी का संदेश “तुम वह परिवर्तन बनो जो तुम दुनिया में देखना चाहते हो” आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक है। संयुक्त राष्ट्र ने भी 2 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया है।महात्मा गांधी का जीवन इस बात का उदाहरण है कि बिना हिंसा और युद्ध के भी आज़ादी हासिल की जा सकती है। वे सच्चे अर्थों में भारत के राष्ट्रपिता हैं और उनकी जयंती हमें हर साल यह याद दिलाती है कि सत्य, अहिंसा और सादगी ही मानवता का वास्तविक मार्ग है।






















































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