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प्रधानी चुनाव का इतिहास (उत्तर प्रदेश व भारत), कब प्रधान या सरपंच अपने पद से होगा आयोग

भारत के संविधान के अनुच्छेद 40 में कहा गया है कि राज्य ग्राम पंचायतों का संगठन करे और उन्हें आवश्यक शक्तियाँ व अधिकार दे।

लेकिन संविधान लागू (1950) होने के बाद भी ग्राम पंचायतों को कानूनी आधार देने में राज्यों की भूमिका सबसे अहम रही।

उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1947 पारित हुआ, जिससे ग्राम पंचायतों की नींव रखी गई।


2. उत्तर प्रदेश में पहला प्रधानी चुनाव

अधिनियम लागू होने के बाद 1949-50 में उत्तर प्रदेश में पहला प्रत्यक्ष पंचायत चुनाव हुआ।

इस चुनाव में ग्राम प्रधान (ग्राम सभा के मुखिया) और पंच (वार्ड सदस्य) चुने गए।

जनता ने पहली बार प्रत्यक्ष मतदान करके ग्राम प्रधान चुना।

यही चुनाव उत्तर प्रदेश का पहला प्रधानी चुनाव कहलाता है।

3. भारत में पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत

1957 में बलवंत राय मेहता समिति गठित हुई। इसने सुझाव दिया कि गाँव से जिला स्तर तक तीन स्तरीय पंचायती राज प्रणाली लागू की जाए।

समिति की सिफारिशों पर 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के नागौर जिले से पंचायती राज व्यवस्था की औपचारिक शुरुआत की गई।

इसके बाद आंध्र प्रदेश ने इसे लागू किया और धीरे-धीरे अन्य राज्यों ने भी अपनाया।


4. उत्तर प्रदेश की भूमिका

उत्तर प्रदेश ने 1947 से ही पंचायत अधिनियम लागू कर दिया था और 1949-50 में चुनाव भी करा दिए थे।

लेकिन 1959 के बाद पूरे देश की तरह यहां भी पंचायती राज संस्थाओं को और मजबूत रूप से लागू किया गया।

आगे चलकर 1992 में 73वां संविधान संशोधन अधिनियम आया, जिसने पंचायतों को संवैधानिक दर्जा दिया।


5. पहले चुनाव की विशेषताएँ (1949-50, उत्तर प्रदेश)

1. यह चुनाव गुप्त मतदान पद्धति से हुआ।


2. ग्राम प्रधान सीधे जनता के वोट से चुने गए।


3. वार्ड सदस्य (पंच) भी चुने गए, जो पंचायत का हिस्सा बने।


4. ग्राम सभा को पंचायत के कार्यों की निगरानी का अधिकार मिला।


5. चुनाव गैर-दलीय (Non-Party) आधार पर हुआ था।

6. वर्तमान प्रणाली से अंतर

पहले चुनाव में ग्राम प्रधान और पंचायत की शक्तियाँ सीमित थीं।

आज ग्राम प्रधान को सरकारी योजनाओं का संचालन, ग्राम विकास निधि का उपयोग और ग्राम पंचायत की बैठक बुलाने का अधिकार है।

पहले आरक्षण व्यवस्था सीमित थी, बाद में SC, ST, OBC और महिलाओं के लिए आरक्षण लागू हुआ।

7. समय-समय पर सुधार

1947 – उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम पारित।

1949-50 – उत्तर प्रदेश में पहला ग्राम प्रधान चुनाव।

1959 – राजस्थान से भारत में पंचायती राज व्यवस्था की औपचारिक शुरुआत।

1992 – 73वां संविधान संशोधन, पंचायतों को संवैधानिक दर्जा मिला।

1994 – उत्तर प्रदेश में 73वें संशोधन के तहत पंचायत चुनाव कराए गए।

उत्तर प्रदेश में पहला प्रधानी चुनाव 1949-50 में हुआ, जबकि भारत स्तर पर पंचायती राज व्यवस्था की औपचारिक शुरुआत 1959 (राजस्थान) से हुई। बाद में 73वें संशोधन (1992) ने इसे पूरे देश में एक समान संवैधानिक रूप दिया।


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