पुलिसिया बर्बरता का आरोप:दूध विक्रेता नरेंद्र कुशवाहा के साथ थर्ड डिग्री का आरोप, नाखून उखाड़ने तक की यातना; चौकी प्रभारी निलंबित, जांच जारी
आगरा।आगरा जनपद से पुलिसिया बर्बरता का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने कानून-व्यवस्था और मानवाधिकारों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पेशे से दूध विक्रेता नरेंद्र कुशवाहा के साथ पुलिस हिरासत में कथित तौर पर थर्ड डिग्री यातना दी गई। आरोप है कि मारपीट के दौरान उनके पैर का नाखून तक उखाड़ दिया गया।
क्या है पूरा मामला
पीड़ित नरेंद्र कुशवाहा अपने भाई के टेंपो पर बैठे हुए थे। बताया जा रहा है कि नरेंद्र को टेंपो चलाना नहीं आता था। इसी बात को लेकर पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। आरोप है कि इसके बाद चौकी में उनके साथ निर्ममता से मारपीट की गई, तलवों पर डंडे मारे गए और गंभीर शारीरिक यातना दी गई।
इतना ही नहीं, पुलिस ने टेंपो को सीज कर दिया, नरेंद्र के पास मौजूद रुपये और मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए, और बाद में उनके खिलाफ शांति भंग की धाराओं में कार्रवाई कर दी गई।
ताज़ा अपडेट: पुलिस विभाग में हलचल
मामला सामने आने के बाद उच्च अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया है।
चौकी प्रभारी को निलंबित कर दिया गया है।
थाना प्रभारी निरीक्षक को लाइन हाजिर किया गया है।
पूरे प्रकरण की विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, जांच रिपोर्ट के आधार पर अन्य पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
परिजनों का आरोप
पीड़ित के परिजनों का कहना है कि नरेंद्र का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वह रोज़मर्रा की मेहनत से परिवार का भरण-पोषण करता है। परिवार ने आरोप लगाया कि घटना के कई दिनों बाद तक FIR दर्ज नहीं की गई, जिससे न्याय प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर आक्रोश देखा जा रहा है। सामाजिक संगठनों और कुछ राजनीतिक दलों ने इसे मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन बताते हुए दोषी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई और पीड़ित को मुआवजा देने की मांग की है।
बड़ा सवाल
एक आम नागरिक, वह भी एक गरीब दूध विक्रेता, के साथ यदि ऐसे व्यवहार के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह संविधान और कानून की आत्मा पर गहरा आघात है। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।
























































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