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पति वह जो नारी की आवश्यकता करे पूरी - मैत्रेय - पांडेबाबा धाम में चल रही रामकथा का तीसरा दिन

 कादीपुर (सुलतानपुर)। जहां नारी की पूजा होती है वहां सारे देवता वास करते हैं । जो पति पत्नी की सभी आवश्यकता पूर्ति करता है वही पति कहलाने का अधिकारी है। यह बातें मानस मराल डॉ कृष्णमणि चतुर्वेदी मैत्रेय ने कहीं । 
 वह पांडेबाबा धाम में करनाईपुर फाउंडेशन द्वारा आयोजित राम कथा के तीसरे दिन कथा सुना रहे थे। 
उन्होंने कहा कि स्त्री की देखभाल कुमारी अवस्था में पिता द्वारा, युवा होने पर पति द्वारा तथा वृद्ध होने पर पुत्र के द्वारा की जाती है। आज समाज में बहुत सी पत्नियां संत्रास झेलने को विवश हैं। सबको चाहिए कि स्त्री की सुख सुविधा का ध्यान रखते हुए उन्हें उचित सम्मान दें । 
 कथा व्यास ने बताया कि जो दूसरों को पीड़ित करता है वह निशाचर होता है । रावण ने अपनी राजाज्ञा में सर्वप्रथम चार प्रतिबंध लगाया । जिसके अनुसार ब्राह्मण भोजन, यज्ञ , होम ,और श्राद्ध बन्द कर दिया गया। इस तरह के भाव वाले ही राक्षस होते हैं।
 मैत्रेय ने रामचरितमानस पाठ भेद पर चर्चा करते हुए कहा कि साधु चरित सुभ चरित कपासू पाठ गलत है। शुद्ध पाठ है साधु सरिस सुभ चरित कपासू । यह पाठ डॉ माता प्रसाद गुप्त द्वारा सम्पादित प्रति व पंडित विश्वनाथ प्रसाद मिश्र के काशीराज संस्करण की हस्तलिखित प्रति में उपलब्ध है।
  मुख्य यजमान शेर बहादुर वर्मा ने व्यासपीठ की आरती उतारी।


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