Religion and Culture / धर्म और संस्कार

भरत चरित्र की कथा सुन भाउक हुए श्रद्धालु

बरहज (देवरिया): श्री कृष्ण इण्टर कॉलेज आश्रम बरहज, देवरिया के पावन प्रांगण में चल रहे योगीराज अनंत महाप्रभु जी के जयंती महोत्सव के विश्राम दिवस के सायंकालीन सभा में मिर्जापुर से पधारे श्यामल मिश्रा ने कहा कि रामचरितमानस में भारत जी का चरित्र बड़ा ही पावन है उन्होंने कहा कि जब उनकी मां भरत के लिए राजतिलक और प्रभु श्री राम के लिए वनवास मांगा उसे समय भारत और शत्रुघ्न बिहार में थे लेकिन भरत के मन में अयोध्या को लेकर भय उत्पन्न होने लगा उन्होंने यह बात अपने मामा को बताया कि हमने रात में भयानक सपना देखा है मुझे लग रहा है कि अयोध्या में कोई अनर्थ हो रहा है जिस पर उन्होंने ब्राह्मण बुलाकर भगवान शिव का अभिषेक कराया पूरी रात बीत गई प्रातः होते ही अयोध्या के पर्रिकर भारत जी के ननिहाल पहुंचे और भारत से कहा कि भरत दोनों भाई आप लोग शीघ्र ही अयोध्या चले भारत की जब अयोध्या आए तो उन्होंने देखा कि अयोध्या में एक अजीब सा सन्नाटा छाया हुआ था कोई किसी से कुछ बोल नहीं रहा था भरत जी जब राजमहल के अंदर प्रवेश किया तो देखा कि राज माताएं सभी सफेद वस्त्र में है और उधर पिताजी स्वर्गवासी हो गए ।

इसका कारण जब भरत जी ने जाना तो उन्होंने कहा कि सारे अनर्थ के मूल में मैं अभागा भरत हू,

दशरथ के अंतिम संस्कार के बाद अगले दिन वशिष्ठ जी ने पूरे मंत्रिमंडल को बैठक भरत की राजगद्दी की बात कही । भरत जी ने कहा की गुरु वशिष्ठ इस सारे सारे समस्याओं की जड़ में आप है अगर आपने मेरी मां के पहले वरदान को लागू किया होता है तो मैं देखा की कौन बड़े भैया राम को वनवास दे देता और भरत में निर्णय लिया कि कल प्रातः काल प्रभु श्री राम को बनाने हम चित्रकूट चलेंगे ।

और अपने प्रभु श्री राम को सीता अनुज सहित लेकर वापस आऊंगा यह सुनकर अवध की प्रजा में प्रसन्नता का माहौल बन गया।

 इस प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर ह उठे।

कथा का संचालन विनय मिश्र ने किया।

इस अवसर पर आश्रम पीठाधीश्वर आंजनेय दास जी महाराज, प्रधानाचार्य अशोक शुक्ला, अभय कुमार पांडे, ओमप्रकाश दुबे, अनमोल मिश्रा, मानस मिश्रा, देव सिंह, पीयूष मिश्रा, सुभाष यादव, हरिशंकर पांडे सहित काफी संख्या में श्रद्धालु जन उपस्थित रहे।


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