घास का तिनका बना ब्रह्मास्त्र, तीनों लोकों में भटकता रहा जयंत; रामलीला में हुआ नेत्र भेदन प्रसंग का मंचन
माता सीता को घायल करना पड़ा भारी, इंद्रपुत्र जयंत को मिला दंड
घोसी।मऊ। अहंकार में उठाया गया एक कदम इंद्रपुत्र जयंत को भारी पड़ गया। माता सीता को घायल करने के बाद जब भगवान श्रीराम ने घास के तिनके को अस्त्र बनाकर उसकी ओर छोड़ा तो जान बचाने के लिए वह तीनों लोकों में भटकता रहा। रामलीला में इसी रोचक और शिक्षाप्रद प्रसंग का भावपूर्ण मंचन किया गया।
पौराणिक कथा के अनुसार देवराज इंद्र के पुत्र जयंत ने कौवे का रूप धारण कर चित्रकूट में माता सीता के चरणों में चोंच मार दी। माता सीता को घायल देख प्रभु श्रीराम ने मंत्रबल से घास के तिनके को शक्तिशाली अस्त्र बनाकर छोड़ दिया। ब्रह्मा जी और भगवान शिव से भी सहायता नहीं मिलने पर देवर्षि नारद की सलाह से जयंत ने श्रीराम के चरणों में गिरकर क्षमा मांगी। प्रभु ने उसकी जान बख्श दी लेकिन दंडस्वरूप उसकी एक आंख नष्ट कर दी। लीला ने संदेश दिया कि अहंकार का अंत पराजय में होता है और अपराध स्वीकार कर क्षमा मांगना ही सच्चा पश्चाताप है।
इस अवसर पर श्री रामलीला समिति के अध्यक्ष सुधीर श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष रामविलास सोनकर, शिवम राय, व्यास राघवेंद्र मिश्रा, सूरज मौर्य, श्रेयांश मिश्रा, अनिकेत वर्मा, विकास मिश्रा, वैभव श्रीवास्तव, प्रियांशु मौर्य और शौर्य मिश्रा सहित अन्य लोग मौजूद रहे। आयोजन में पुलिस प्रशासन का भरपूर सहयोग मिला।


























































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